अनुक्रमणिका

संपादकीय
डॉ. आलोक रंजन पांडेय

शोधार्थी

बंजारा लोक साहित्य का भाषावैज्ञानिक अध्ययन – जेतलाल नामदेव राठौड़, डॉ. एस. के. मोहम्मद शाकिर एस. के. बाशिर

भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक साहित्य – डॉ.लिट्टी योहन्नान

भारतीय अध्यात्म, दर्शन एवं संस्कृति के बोलते चित्र: लोक साहित्य का दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विश्लेषण – डॉ. उमा शंकरभाई शर्मा

‘कुमाऊनी लोकसाहित्य में स्त्री संघर्ष’ – गीता तिवारी

लोक की बोलियों का मानवीय जीवन मूल्यों के संरक्षण में विशेष योगदान – नविता मीना

राजस्थान के लोक नृत्य का अध्ययन – डॉ. शिवकुमार

लोक कथाएँ बाल साहित्य की अमूल्य धरोहर – डॉ. नीलू सिंह

क्षेत्रीय अस्मिता और लोकनृत्य – डॉ प्रदीप रेवाप्पा सरवदे और प्राजक्ता उमेश अभ्यंकर

लोक जीवन शैली पर आधुनिकता का प्रभाव (साहित्य और सिनेमा के संदर्भ में एक अध्ययन) – प्रिया

ग्रामीण जीवन शैली में कहावतें: एक सांस्कृतिक-समाजशास्त्रीय अध्ययन – मनोजित रॉय

ग्रामीण जीवन शैली में कहावतें – ममता

लोकसाहित्य में भारतीय संस्कृति (हिंदी साहित्य के संदर्भ में) – राजलक्ष्मी जी

राजस्थान के प्रतिबंधित गीतों और कविताओं में लोक प्रतिरोध का स्वर – रामप्यारी

संत मलूकदास के काव्य में लोक संस्कृति और लोक भाषा – रीना आर्य

आधुनिक हिंदी उपन्यासों में चित्रित प्रेम के विविध रूप – सजनी एंथोनी

लोकगीतों का भाव-कला तत्त्व और तीसरी कसम के गीतों का दृश्य विधान – सिमरन सिंह

वैश्वीकरण के दौर में भारतीय लोक संस्कृति – प्रिंस गुप्ता

बंजारा बोली की सत्ता और महत्ता – प्रा. सूर्यकांत रामचंद्र चव्हाण

लोक साहित्य में स्त्री संघर्ष: एक मूल्यांकन – भारती जैन

लोकसाहित्य एवं लोककलाएँ: एक अकादमिक अध्ययन – डॉ. अनिताबहन मंगलदास राठवा

लोकसाहित्य में अभिव्यक्त पर्यावरण चेतना – प्रा.डॉ.सादिकअली हबीबसाब शेख

पर्यावरणीय चेतना और लोकसाहित्य – प्रा. मानखेडकर बी एस

लोक साहित्य एवं लोक कलाएँ – डॉ. शिल्पा कामलिया

लोक संस्कृति में भारतीय आत्मा – डॉ. दीपा कुमारी

कन्नड लोकसाहित्य में अभिव्यक्त पर्यावरण चेतना – डॉ. शिवानंद एच कोली

लोक साहित्य में स्त्री संघर्ष: परंपरा, प्रतिरोध और अस्मिता – डॉ. अनुपमा

वैश्वीकरण के दौर में भारतीय लोक संस्कृति : चुनौतियाँ, संभावनाएँ और संरक्षण की दिशा – डॉ. विक्रमसिंह पवार

ग्रामीण जीवन शैली में कहावतें: एक समाजशास्त्रीय एवं सांस्कृतिक अध्ययन – सुरेन्द्र सिंह

राजस्थानी लोककथाओं में वीरता और नैतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति – डॉ. रेणुका

   तमिलनाडु लोकगीत: भावपक्ष एवं कलापक्ष – डॉ. सुनील पाटिल

भारतीय ज्ञान परम्परा एवं लोकसाहित्य – जयवीर सिंह, डॉ. प्रवीण तुलशीराम तुपे

ग्रामीण जीवन शैली में कहावतें : लोकानुभव, सांस्कृतिक स्मृति और साहित्यिक प्रयोग – रजनी साहू

  गिरीराज किशोर के उपन्यासों में चित्रित लोक जीवन एवं संस्कृति – अंजु जॉय

छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति में लोक नृत्य – डॉ. आरती पाठक

लोक उत्सव एवं सामाजिक जनचेतना (महाराष्ट्र के विशेष संदर्भ में) – डॉ. दीपक विनायकराव पवार

भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक साहित्य – श्यामसुंदर धाकड़

लोक साहित्य में भारतीय समाज, धर्म और परंपरा – अशोक कुमार

लोक साहित्य में भारतीय संस्कृति – कोमल दगडु तडवी

लोकसाहित्य के अध्ययन की प्रक्रिया एवं दिशाएँ – डॉ. गोम देवी शर्मा

भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक साहित्य: एक दार्शनिक, सांस्कृतिक और सामाजिक अध्ययन – तबस्सुमबानु अल्लारखा मलेक

भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक साहित्य :एक विस्तृत अध्ययन – कुमारी आकांक्षा

लोक उत्सव और सामाजिक जनचेतना – राखी प्रवीण कोटला, डॉ. हनुमंत दशरथ जगताप

असमिया विवाह गीतों में प्रतिफलित परंपरागत ज्ञान – डॉ. अर्चना हज़ारीका

लोकसाहित्य में अभिव्यक्त पर्यावरणीय चेतना – प्रा. विभुते आर . व्ही.

‘धरती मेरी माँ’ में लोक चेतना – डॉ. रेंजी कोशी

स्त्रियों के संघर्ष की गाथा : भोजपुरी लोकगीत – सौरभ कुमार

अनुभूति

समझ (लघुकथा) – डॉ. सौरभ कुमार झा

डॉ.गोविंद गुंडप्पा शिवशेट्टे की कविताएं

वीरेंद्र की कविताएं

ऑपरेशन सिंदूर – डॉ. पवन कुमार

 

समीक्षा

संग्रहणीय है केंद्रीय हिंदी निदेशालय,उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार का ‘भाषा’पत्रिका’ – किरन झा