अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका संपादकीय  डॉ. आलोक रंजन पांडेय बातों – बातों में  समाज को जगाने के लिए टॉर्चबियरर की तरह से होता है साहित्यकार : नीरजा  माधव – डॉ. नूतन पाण्डेय शोधार्थी […]

समाज को जगाने के लिए टॉर्चबियरर की तरह से होता है साहित्यकार : नीरजा  माधव – डॉ. नूतन पाण्डेय

साहित्य की अनेक विधाओं में अपनी कलम से चमत्कृत करने वाली हिंदी साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव पाठकों के मध्य जितनी लोकप्रिय हैं, उतनी ही साहित्य मनीषियों द्वारा प्रशंसित भी रही […]

सिलहटी रामायण – अभय रंजन

सिलहट पूर्वोत्तर बांग्लादेश में एक महानगरीय शहर है । बंगाल के पूर्वी सिरे पर सूरमा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित एक उष्णकटिबंधीय जलवायु और हरे-भरे ऊंचे इलाके वाला शहर […]

चंडी चरित्र : हमारी समृद्ध परंपरा का आख्यान- मधुबाला 

हिंदी साहित्य की सुंदरता इस बात में मानी जा सकती है कि प्रत्येक युग में योग निरपेक्ष प्रवृत्तियों से युक्त रचनाएँ भी हुई हैं। इसी तथ्य को प्रमाणित करने के […]

प्रेम और सौन्दर्य के कवि : गिरिजाकुमार माथुर – सुदेश कुमार 

शोध सार :- नयी कविता के अत्यंत समर्थ आधार-स्तम्भ के रूप में कवि गिरिजाकुमार माथुर हैं जिन्होंने किसी वाद से प्रभावित होकर कविता की रचना नहीं की वरन युगीन मांगों […]

एक प्रश्नाकुल मनःस्थिति- चेक रचनाकार कारेल चॉपेक का कथा संसार – डॉ. मीनू गेरा

प्रस्तावना- बीसवीं शताब्दी के यूरोपीय साहित्यकारों ने अनुभवों और विचारों के धरातल पर वैविध्य के ऐसे संसार को खड़ा किया जिसने भौगोलिक सीमाओं को तो परिभाषित किया, चेतना के धरातल […]

मैथिलीशरण गुप्त कृत ‘साकेत‘ में भारतीय संस्कृति के विविध आयाम – कल्याण कुमार

संस्कृति किसी भी राष्ट्र की आधारशिला होती है। राष्ट्र रूपी वृक्ष का निर्माण संस्कृति रूपी बीज के प्रस्फुटन से ही होता है। राष्ट्र के भीतर समाहित समाज,परिवार और व्यक्ति के […]

महात्मा गांधी – बीसवीं सदी का नित्सियन महामानव – प्रशांत कुमार पांडेय

जब भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की बात होती है, मोहन दास करमचंद गांधी का नाम बड़े इज्जत से लिया जाता है। पूरी दुनिया में जहाँ भी लोगों ने आजादी […]

शरद सिंह के उपन्यासों के संदर्भ में नारी-विमर्श – सपना

हिंदी-साहित्य में एक सुपरिचित और प्रतिष्ठित नाम है, ‘शरद सिंह’ जिन्होंने नारी की दसदिक् पीड़ाओ को अपने साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्ति प्रदान की है। गद्य एवं पद्य की अनेक […]

कुमार सोनकरन का दोहार्द्धशतक

01. वे नरेन्द्र पशुतुल्य हैं, क्या ब्राह्मण क्या सूद। अन्तस में जिनके नहीं, मानवता मौजूद।। 02. खून माॅंस भी एक है , जाति योनि भी एक। फिर नरेन्द्र हैं क्यों […]