एक बार एक युवक अपनी असफलताओं से बहुत परेशान था। उसे लगता था कि दुनिया के सभी लोग उससे बेहतर हैं। वह हर दिन दूसरों की सफलता देखकर दुखी हो जाता और अपनी कमियों को कोसता रहता।
एक दिन वह एक साधु के पास पहुँचा और बोला, “मुझे समझ नहीं आता कि मैं खुश क्यों नहीं रह पाता?”
साधु उसे एक शांत झील के किनारे ले गए। उन्होंने झील के पानी में देखने को कहा। युवक ने अपना चेहरा देखा। तभी साधु ने पानी में एक पत्थर फेंक दिया। लहरें उठीं और चेहरा धुंधला हो गया।
साधु बोले, “जब मन अशांत होता है, तब इंसान खुद को नहीं देख पाता। और जब खुद को नहीं समझ पाता, तब पूरी दुनिया गलत लगने लगती है।”
युवक कुछ देर चुप रहा। फिर साधु ने कहा, “दूसरों को समझने में पूरी ज़िंदगी मत लगा दो। पहले अपने मन, अपनी क्षमता और अपनी कमियों को पहचानो। जो खुद को समझ लेता है, उसे रास्ते अपने आप दिखाई देने लगते हैं।”
उस दिन युवक ने एक अनमोल सीख पाई। उसने दूसरों से तुलना करना छोड़ दिया और स्वयं को बेहतर बनाने में लग गया। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास लौटा और जीवन में खुशियाँ भी। ज़िंदगी में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति आप स्वयं हैं। जो खुद को समझ लेता है, वह हर परिस्थिति को समझने की शक्ति पा लेता है।

डॉ. सौरभ कुमार झा
कालिंदी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय