भारत में लोक और लोक में भारत भारतीय संस्कृति और उसकी परंपराओं का निर्माण अनेक कारकों से हुआ है। इन कारकों में जितना क्षेत्रीय विविधता की भूमिका है, उतनी हीउनकी […]
संपादकीय

राष्ट्रपिता ,बापू ,सत्यवादी ,अहिंसावादी , सत्याग्रही, स्वतंत्रता संग्राम के नायक ,भारतीय जनता का नेतृत्व करने वाले मोहनदास गांधी पिता कर्मचंद व माँ पुतलीबाई की सबसे छोटी संतान थे ।राजकोट के […]
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प्रेमचन्द : समाज का दर्पण और साहित्य का शिल्पी हिंदी साहित्य की दुनिया में यदि किसी लेखक को यथार्थ का सबसे सशक्त और व्यापक चित्रकार कहा जाए तो वह मुंशी […]
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हर मौसम अपने संग अपने तरह के विमर्श और अपनी तरह की चिंताएं लेकर आता है । जैसे इस समय पर जब हिन्दी दिवस का उत्सव मनाया जा रहा है […]
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‘सहचर’ का यह अंक ऐसे समय में आ रहा है जब वातावरण शुष्क होने लगता है और गर्म हवाएं चलती हैं । फिर भी कुछ फूल हैं जो इस मौसम […]
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वैश्विक साहित्य में राम राम भारतीय जन-जीवन में व्याप्त एक कालजयी चरित्र हैं,जिन्होंने संपूर्ण विश्व को अपने आदर्श एवं मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप से प्रभावित किया है।जिसमें सब रम जाएँ वहीं […]
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सहचर की पूरी टीम की मेहनत के फल स्वरूप पत्रिका का यह अंक आपके समक्ष है। यह पत्रिका अब अपने सातवें वर्ष में है।इन सात वर्षों में आप सभी पाठकों […]
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आज़ाद और जवान होता सिनेमाई पर्दा सिनेमा हमारे आम जीवन का अब एक अभिन्न अंग बन चुका है। एक शतकीय पारी से ज़्यादा का जीवन जी चुका यह एक ऐसा […]
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हिंदी साहित्य में महिलाओं के लेखन की शुरुआत की बात जब भी आती है तो हम सबसे प्रचलित नाम जिसने स्वयं को कृष्ण प्रेम में डुबा दिया, उसका नाम लेते हैं […]
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हमारा देश और पूरा विश्व इस समय मुश्किल परिस्थितियों से गुज़र रहा है। कोरोना ने लगभग समूचे परिदृश्य को बदल दिया है।देश की आर्थिक स्थिति लॉकडाउन बढ़ने के साथ-साथ नाज़ुक […]






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