भारतीय योग परंपरा और कबीर – डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय

कबीर भक्तिकाल के संत कवियों में श्रेष्ठतम स्थान रखते हैं । इन्होंने अपने काव्य में भारतीय योग दर्शन का समुचित प्रयोग किया ।योग तन, मन, आत्मा समेत चेतना की सभी […]

हिंदी आलोचना में कबीर की विविध छवियाँ – विनय कुमार गुप्ता

कबीर क्या थे? और अब उनकी क्या-क्या छवियाँ हैं? यह मालूम करना बहुत ही मुश्किल है। क्योंकि अतीत से वर्तमान तक कबीर की छवि में बहुत परिवर्तन आया है और […]

कबीर: सामंती समाज का लोकतांत्रिक व्यक्तित्व – आशुतोष तिवारी

कबीर घोर सामंती समाज में पैदा हुए थे। उस समय अपने हितों को सुरक्षित करने के लिए जमींदारों, पुरोहितों-पंडों, मौलवियों आदि ने समाज को अपनी सुविधा के अनुसार बांट रखा […]

कबीर की सामाजिक चेतना के आयाम – ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह

कबीर का जन्म ऐसे समय में हुआ जब समाज अनेक बुराइयों से ग्रस्त था। छुआछूत, अन्धविश्वास, रूढ़िवादिता, मिथ्याचार, पाखण्ड का बोलबाला था और हिन्दू-मुसलमान आपस में झगड़ते रहते थे । […]

कबीर के अध्ययन की समस्याएँ – ललन कुमार

हिंदी साहित्य के इतिहास में कबीर का स्थान भक्तिकाल के शुरूआती दौर में माना जाता है। कबीर भक्तिकाल और आदिकाल की संधिबेला पर अवस्थित हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, […]

कबीर के काव्य में ब्रह्म का स्वरूप – आरती

हिन्दी साहित्य में मध्यकाल का बहुत महत्त्व है। मध्यकाल को स्वर्ण युग भी कहा गया है। मध्यकाल में बहुत से कवि हुए लेकिन कुछ कवि सूर्य के समान हैं जिनमें […]

काशी के कबीर – डाॅ. संगीता राय

कबीर को सलेबस में ख़ूब पढ़ा है, पर उससे भी पहले उन्हें सुना है। कबीर कोई दरबारी कवि नहीं थे। मन की मौज आयी और कह दिया। कबीर ने जो […]

कबीरकाव्य में सामाजिक एकीकरण – शान्तिलाल

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में घटित घटनाओं से अछूता नहीं रह सकता और समाज का उस पर गहरा प्रभाव पडता है। जब व्यक्ति का नैतिक स्तर गिरता […]

कबीर काव्य में सामाजिक चेतना – नीलम शर्मा

समाज व्यापक मानव-समूह का प्रतीक है। यहाँ नाना प्रकार की परम्पराएँ और विचारधाराएँ जन्म लेती हैं, विकसित होती हैं और अन्ततः इसी तीव्र प्रवृत्ति  से समाप्त हो जाती हैं। इनमें […]

वर्तमान संदर्भ में कबीर की सामाजिक दर्शन की प्रासंगिकता – आनंद दास

कबीर काव्य की पृष्ठभूमि-निर्माण में कबीर का व्यक्तिगत जीवन विशेष सहायक रहा है। जन्म स्थान काशी का धर्मान्ध वातावरण, माता-पिता के कारण प्राप्त विरोधी संस्कार, पारिवारिक जीवन से असन्तुष्टि, जातिगत […]