
यह शोधपत्र प्रेमचंद के साहित्य और प्रवासी हिंदी साहित्य के मध्य एक सर्जनात्मक और वैचारिक संवाद की संभावना का विश्लेषण करता है। प्रेमचंद भारतीय उपन्यास और कथा साहित्य की परंपरा […]

यह शोधपत्र प्रेमचंद के साहित्य और प्रवासी हिंदी साहित्य के मध्य एक सर्जनात्मक और वैचारिक संवाद की संभावना का विश्लेषण करता है। प्रेमचंद भारतीय उपन्यास और कथा साहित्य की परंपरा […]

प्रस्तावना (Introduction): मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) हिन्दी कथा साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं। वे अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण, जनसरोकारों से जुड़ी विषयवस्तु, और सरल-सुबोध भाषा के लिए जाने जाते हैं। ‘कफन’ उनकी […]

प्रेमचंद ने हिंदी कथा साहित्य में उपन्यास को ऐयारी और तिलिस्मी दुनिया से बाहर निकाल कर सहज जीवन में स्थापित किया तथा समाज में आदर्शवाद की नींव रखी । प्रारंभिक […]

शोध सारांश – प्रेमचंद हिंदी साहित्य जगत के अद्वितीय कथाकार हैं। वे हिंदी साहित्य आकाश के ऐसे चंद्रमा है जिन्हें हर हिंदी प्रेमी चकोर की भांति प्रेम और सम्मान पूर्वक […]

प्रस्तावना:- हिंदी साहित्येतिहास लेखन की एक सुदीर्घ परम्परा रही है। विदेशी प्रयासों से आरंभ होकर भारतीय हिंदी साहित्येतिहासकारों तक पहुंचने में हिंदी साहित्येतिहास ने एक लंबा रास्ता तय किया है। […]

संबंधों की बगिया है उजड़ी फूल-पत्ते भी चुप-चुप हैं बसंती बयार भी भटकी हुई सुख-बादल भी गुमसुम हैं! नदी संवेदना की सूख गई उजड़े-उजड़े कूल-किनारे! सूखी नदी में नौका […]

सूर्य देवता आग उगल रहे हैं, हवा का कहीं नामों-निशान नहीं और बह भी रही है, तो मंद मंद गति से पेड़-पौधे सब सूख गए, इस समय तो बरसात होने […]

आज मैंने सूरज को देखा, आसमान में नहीं,तपती हुई सड़कों पर, आँखों में चमक, सूखे ओंठ और मैले कपङों में। अपनी सारी कमाई अपने लाङले ग्रहों पर लुटाने वाला सूरज, […]

बाल मन पर संस्कार हो नैतिक शिक्षा और मानवीयता के बाल मन पर संस्कार हो सच्चाई और ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य पूरा करने के बाल मन पर संस्कार […]

ये जो जीवन है, महज संघर्षों का पिटारा है। विनाश और विकास ये एक दूसरे का पूरक और सहारा है। विनाश जहां है, विकास भी वहां निश्चय है। विकास जब […]