वीरेंद्र की कविताएं

मन एकाकी सा मन एकाकी सा विस्मृत विस्मृत लगा सोचने काल चक्र गति वो निश्चिन्त कुलाचें भरता बचपन माँ का प्यार, था कैसा पावन अतीत के धूमिल होते पल क्षिन […]

ऑपरेशन सिंदूर – डॉ. पवन कुमार

पहलगाँव की धरती रोई, छल से किया जो वार। निर्दोषों के खून से लथपथ, यह अपना घर द्वार। नही मौन अब भारत बैठा, टूट पड़ा बन सिंह प्रचंड जैसा जिसने […]

संग्रहणीय है केंद्रीय हिंदी निदेशालय,उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार का ‘भाषा’पत्रिका’ – किरन झा

200 वर्षों की हिंदी पत्रकारिता के सफर विषय पर प्रकाशित भाषा का विशेषांक वास्तव में बेहतरीन है।30 मई 1826 में कलकत्ता से हिंदी का पहला समाचार पत्र उदंत मार्त्तंड का […]

अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पांडेय, प्रो. बबीता काजल   शोधार्थी किसान का त्याग, कवि का सत्य,नेतृत्व का अटूट विश्वास विश्ववंद्य राष्ट्र- पिता महात्मा गांधी ( ललित निबंध के संदर्भ […]

संपादकीय

राष्ट्रपिता ,बापू ,सत्यवादी ,अहिंसावादी , सत्याग्रही, स्वतंत्रता संग्राम के नायक ,भारतीय जनता का नेतृत्व करने वाले मोहनदास गांधी पिता कर्मचंद व माँ पुतलीबाई की सबसे छोटी संतान थे ।राजकोट के […]

किसान का त्याग, कवि का सत्य,नेतृत्व का अटूट विश्वास विश्ववंद्य राष्ट्र- पिता महात्मा गांधी ( ललित निबंध के संदर्भ में) – डॉ. जितेंद्र पीतांबर पाटिल

भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु विश्व साहित्य पर भी महात्मा गांधीजी के विचारों का गेहरा प्रभाव दृष्टिकोचर होता है l महात्मा गांधी के दर्शनशास्त्र का आकर्षण सारे विश्व साहित्य मे […]

महात्मा गांधी का स्वराज्य विचार – डॉ. परेश जी. पारेख

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में “स्वराज्य” शब्द का प्रयोग अनेक नेताओं ने किया, किंतु इसे वास्तविक जीवन, नैतिकता, और जनमानस की भाषा में रूपांतरित करने का श्रेय केवल महात्मा […]

गिरिराज किशोर के उपन्यास ‘पहला गिरमिटिया’ में गांधी का वैचारिक प्रभाव – अंजु रॉय

गिरिराज किशोर जी का ब्रहतकाय उपन्यास ‘पहला गिरमिटिया’ आधुनिक भारतीय ऐतिहासिक कथा साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है। जो मोहनदास करमचंद गांधी के दक्षिण अफ्रीकी जीवन पर […]

हिंदी भाषा में महात्मा गांधी का योगदान – कोमल दगडु तडवी

प्रस्तावना : महात्मा गांधी के जीवन में हिंदी का महत्व एक साझा राष्ट्रीय भाषा के रूप में था, जो भारत को एकजुट कर सके और जन-जन की आवाज बन सके। […]

अवधी लोकधुनों में गाँधीवाद – प्रो.गरिमा जैन और डॉ.पन्नन बाजपेई

भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं था। वह एक सांस्कृतिक और नैतिक पुनर्जागरण भी था। महात्मा गाँधी के आदर्श सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, ग्राम स्वराज और समानता ने देश के […]