गांधीवाद और हिंदी साहित्य – प्रियंका

शोध सार :- गाँधी के जीवन और उनके विचारों को कई अलग-अलग धाराओं में समझने का प्रयास किया गया उनके विचारों और दर्शन को गांधीवाद नाम दिया गया जिसे हम […]

प्रसाद युगीन हिन्दी नाटक और गांधीवाद – डॉ० गीता पांडेय

हिंदी नाटक का प्रारंभ भारतेंदु युग से हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न पक्षों एवं क्षेत्रों को साहित्य संवेदना का विषय बनाया गया। इस युग में समाज-सुधार आंदोलन, देश-प्रेम, राष्ट्र-भाषा के […]

सत्य की कसोटी पर सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा –  डॉ. लविन्द्रसिंह लबाना

सत्य के साधक महात्मा गांधी का नाम केवल भारत में ही नहीं सारे संसार में प्रसिद्ध है। गांधीजी का जन्म गुजरात के पोरबंदर शहर में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ […]

प्रवासी भारतीय साहित्य में गांधी: एक विस्तृत अध्ययन – कुमारी आकांक्षा

शोध सार प्रवासी भारतीय साहित्य भारतीय संस्कृति इतिहास और मूल्य बोध को विदेशों में बसे भारतीयों की दृष्टि से प्रस्तुत करता है ।प्रवासी भारतीय साहित्य में गांधीजी एक बहु आयामी […]

प्रवासी भारतीय साहित्य में गांधी: एक विस्तृत अध्ययन – अनुराग तिवारी प्रेमचंद                                                                                                       

शोध-सारांश                 गाँधीजी राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के विवेकशील राजनेता थे| उन्होंने राजनैतिक स्वतंत्रता की प्राप्ति हेतु सामाजिक मुद्दों पर एकजुट होने का मार्ग सुझाया क्योंकि वे जानते थे कि भारत […]

सत्य, अहिंसा और त्याग के प्रेरणा स्रोत महात्मा गांधी – डॉ. सूर्यकांत शिंदे

प्रस्तावना: जब भी हम भारत के आजादी के आंदोलन की बात करते है, तब आनायास ही महात्मा गांधी का नाम हमारे मन में सबसे पहले आता है। गांधी जी के […]

हिंदी भाषा और महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत- पवन कुमार

शोध सार : हिंदी भाषा और महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत दोनों भारतीय सभ्यता और संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं। हिंदी भाषा ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम […]

गांधी चिंतन के आलोक में जैनेंद्र कुमार के उपन्यास सुनीता का विश्लेषण – शिखा सिंह

शोध सार– राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का व्यक्तित्व इतना विराट एवं प्रभावशाली था कि भारतीय राजनीति से लेकर लगभग भारत की प्रत्येक भाषा के साहित्य में हमें उनके विचारों की […]

साहित्य की कसौटी पर महात्मा: गांधी के लेखन का आलोचनात्मक अध्ययन – डॉ. श्वेत प्रकाश

शोध सारांश: महात्मा गांधी के विपुल लेखन को विश्लेषित करने का प्रयास है, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु उनकी विशुद्ध साहित्यिक उपादेयता है। गांधी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे; वे […]

ओस की बूँद: सांप्रदायिकता बनाम सामासिकता – उज्ज्वल शुक्ला

शोधसार: हिंदी साहित्य में भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण तत्व सामासिकता हमेशा से लक्षित होता रहा है। इसी के साथ विभाजन के पहले और बाद में इस सामासिकता पर सांप्रदायिकता […]