मलयालम साहित्य में महात्मा गांधी का प्रभाव: नैतिकता, सामाजिक सुधार और प्रेरणा का स्रोत – डॉ. दीपा कुमारी 

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक स्वतंत्रता की लड़ाई नहीं थी; बल्कि यह समाज और संस्कृति के पुनर्जागरण का भी युग था। मोहनदास करमचंद गांधी ने जनता को केवल राजनीतिक रूप से […]

मनोवैज्ञानिक कल्याण पर जाति, लिंग और पहचान की अंतर्क्रिया: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन – रजत तिवारी

शोध सार भारतीय समाज में व्यक्ति का मानसिक अनुभव केवल व्यक्तिगत कारकों से निर्धारित नहीं होता, बल्कि जाति, लिंग और सामाजिक पहचान जैसी संरचनाएँ उसके जीवन की दिशा और उसके […]

नरेश मेहता के खण्डकाव्य-दृष्टि में गांधीवादी विचारधारा की अभिव्यक्ति – पंड्या. किंजल. डी

प्रस्तावना   भारतीय साहित्य में चिंतन की परम्परा निरंतर मानवीय संवेदना और जीवन-मूल्यों से जुड़ी हुई है। रचनाकार और कवि अपने समय की नैतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक परिस्थितियों को अपनी […]

जैनेंद्र कुमार और गांधीवादी विचारधारा – डॉ. लिजा अचाम्मा जॉर्ज

भूमिका हिन्दी साहित्य के इतिहास में जैनेंद्र कुमार एक ऐसे उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर उसे समाज और मनुष्य की […]

हिंदी साहित्य में गांधी दर्शन का प्रभाव – डॉ. निशा जैन

सारांश: महात्मा गांधी का दर्शन केवल एक राजनीतिक सोच ही नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक, नैतिक और मानवीय दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय जीवन के हर क्षेत्र पर गांधीजी के विचारों का […]

हिन्दी साहित्य में गांधीवादी विचारधारा का प्रभाव – डॉ. सुनील मुरलीधर पाटिल

गांधीवादी विचारधारा भारतीय इतिहास, समाज और साहित्य के विकास में एक केंद्रीय भूमिका निभाने वाली विचारधारा रही है। मा. गांधी के नेतृत्व में सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और नैतिकता जैसे […]

म. गांधीजी का व्यक्तित्व और नैतिक संघर्ष: ‘मेरे सत्य के प्रयोग’ के संदर्भ में – डाॅ. विलास गायकवाड

सारांश ः महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा’ उनके जीवन, विचारों और अनुभवों का एक ईमानदार व आत्मविश्लेषणात्मक दस्तावेज़ है।इस ग्रंथ में गांधीजी ने अपने जीवन को किसी […]

राग दरबारी में गाँधीवादी चेतना –  डॉ. रंजी कोशी

श्रीलाल शुक्ल हिंदी के एक प्रमुख व्यंग्य साहित्यकार हैं। ‘सूनी घाटी का सूरज’, ‘रागदरबारी’, ‘अज्ञातवास’, ‘सीमाएँ टूटती हैं’, ‘आदमी का ज़हर’, ‘मकान’, ‘पहला पडाव’, ‘बिस्रामपुर का संत’, ‘राग-विराग’ आदि उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। ‘अंगद का पाँव’, ‘यहाँ से वहाँ […]

गांधी और हिन्दी साहित्य- डॉ. ममता सहगल

सारांश महात्मा गांधी केवल भारतीय राष्ट्रवाद के सबसे प्रभावशाली नेता नहीं थे, बल्कि वे साहित्य, भाषा और संस्कृति के भी सशक्त प्रवक्ता थे। उन्होंने हिन्दी भाषा को राष्ट्रीय एकता के […]

ओडिया साहित्य में गाँधी –  डॉ. भारती लक्ष्मी पाल

“जो बदलाव तुम दुनिया में देखना चाहते हो, वह खुद में लेकर आओ” – महात्मा गाँधी शोध सार: महात्मा गाँधी के विचार विश्व के सामजिक एवं राजनैतिक आन्दोलन को प्रभावित किया। […]