
सारांश हमारे समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी जो गीत, नृत्य, नाट्य, कथा, कहानी मौखिक रुप में जन साधारण में प्रवाहमान है उसी को लोक साहित्य कहा […]

सारांश हमारे समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी जो गीत, नृत्य, नाट्य, कथा, कहानी मौखिक रुप में जन साधारण में प्रवाहमान है उसी को लोक साहित्य कहा […]

सारांश महात्मा गांधी का ईश्वर में अटूट विश्वास था उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करना था सत्य और अहिंसा उनका ब्रह्मास्त्र था । सादा जीवन उच्च विचार […]

भूमिका महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने न केवल राजनीति, बल्कि समाज और साहित्य को भी गहराई से प्रभावित किया। गाँधीजी का व्यक्तित्व सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, […]

सारांश यह शोध-आलेख कन्नड गद्य साहित्य में महात्मा गांधी के विचारों की साहित्यिक अभिव्यक्ति और वैचारिक प्रभाव का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। गांधी-विचार—जैसे सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, ग्रामस्वराज, श्रम की […]

शोध सारांश – महात्मा गांधी का साहित्य उनके भाषणों, लेखों, पत्रों तथा आत्मकथाओं का बहुत वृहद संग्रह है , जो सत्य , अहिंसा तथा स्वदेशी जैसे उनके सिद्धांतों पर आधारित […]

1. प्रस्तावना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में मोहनदास करमचंद गांधी का नाम एक ऐसी विभूति के रूप में अंकित है जिसने केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज, संस्कृति […]
शिक्षा समाज का आधार है, और शिक्षक इस आधार को मजबूत करने वाले कारीगर हैं। प्राचीन काल से ही शिक्षक ज्ञान के संवाहक, नैतिकता के प्रहरी और समाज के निर्माणकर्ता […]

महात्मा गांधी का भारतीय समाज और साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा। हिन्दी साहित्य ने उनके विचारों—अहिंसा, सत्य, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और नैतिकता—को आत्मसात किया। यह शोध-पत्र हिन्दी साहित्य में गांधीजी के […]

भूमिका भारतीय साहित्य में बीसवीं शताब्दी का काल सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक चेतना के उदय का काल रहा है। इस काल में स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रवाद, अहिंसा, सत्य और स्वदेशी जैसे […]

“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” — यह वचन न केवल सत्य है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जन्मभूमि स्वर्ग से भी अधिक महान है। एक राष्ट्र को तभी राष्ट्र कहा […]