राग दरबारी में गाँधीवादी चेतना –  डॉ. रंजी कोशी

श्रीलाल शुक्ल हिंदी के एक प्रमुख व्यंग्य साहित्यकार हैं। ‘सूनी घाटी का सूरज’, ‘रागदरबारी’, ‘अज्ञातवास’, ‘सीमाएँ टूटती हैं’, ‘आदमी का ज़हर’, ‘मकान’, ‘पहला पडाव’, ‘बिस्रामपुर का संत’, ‘राग-विराग’ आदि उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। ‘अंगद का पाँव’, ‘यहाँ से वहाँ […]

गांधी और हिन्दी साहित्य- डॉ. ममता सहगल

सारांश महात्मा गांधी केवल भारतीय राष्ट्रवाद के सबसे प्रभावशाली नेता नहीं थे, बल्कि वे साहित्य, भाषा और संस्कृति के भी सशक्त प्रवक्ता थे। उन्होंने हिन्दी भाषा को राष्ट्रीय एकता के […]

ओडिया साहित्य में गाँधी –  डॉ. भारती लक्ष्मी पाल

“जो बदलाव तुम दुनिया में देखना चाहते हो, वह खुद में लेकर आओ” – महात्मा गाँधी शोध सार: महात्मा गाँधी के विचार विश्व के सामजिक एवं राजनैतिक आन्दोलन को प्रभावित किया। […]

‘कितने पाकिस्तान’ इतिहास का पुनराख्यान – डॉ. चन्दन कुमार

कमलेश्वर ने ‘ कितने पाकिस्तान ‘ के विराट कथ्य में जहाँ एक ओर पौराणिक या पुराकथाओं का प्रयोग कर साहित्य और लोक प्रचलित इतिहास में मिथकों की परम्परा और प्रयोग […]

मुंशी प्रेमचंद जी के उपन्यासों में वर्णित विषम दाम्पत्य जीवन (गोदान, निर्मला, वरदान, सेवा सदन और प्रतिज्ञा उपन्यासों के आधार पर – डॉ. हरिन्दर कुमार

भारतीय चिंतन में विवाह को एक पवित्र एवं पुण्य संस्कार के रूप में स्वीकार किया गया है। यह मानव को दायित्ववान और परिपक्व बनाने के लिए आवश्यक है। सरल शब्दों […]

धम्म-सेतु (कविता) – प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार सिंह

धम्म-सेतु, धरा और धम्म का संगम भारत-नेपाल की साझा बौद्ध विरासत लुम्बिनी की पवित्र प्रात में, उभर रहा सेतु, सौगात में। भारत की वाणी, बुद्ध की राह, फिर जग में […]

प्रो. पंढरीनाथ पाटील “शिवांश “ की कविताएं

ईमान.. छीनी जा रहीं हैं मुझसे मेरी कविता, काग़ज़ और लेखनी भी! जी बिल्कुल, उनकी ही तरह! उन्हें बचानी हैं नौकरी, या कुछ कमाना भी होगा! मेरा क्या कवि हूँ, […]

दृष्टिकोण (कहानी) – डॉ० उपासना पाण्डेय

दृष्टिकोण (कहानी) सुनैना असहनीय पेट दर्द के कारण जब अस्पताल पहुँची तो उसे पता चला कि उसकी किडनी २० प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है। अतएव उसे स्वरूपरानी चिकित्सालय में […]

‘द वॉर दैट मेड रॉ’ पुस्तक की समीक्षा – अमन शर्मा

प्रस्तावना  द वॉर दैट मेड रॉ नामक पुस्तक, लेखक अनुषका नंदकुमार एवं संदीप साकेत द्वारा लिखी गई है, जिसमें आधुनिक भारत के खुफिया तंत्र के उद्भव, विशेष रूप से अनुसंधान […]

संपादकीय

प्रेमचन्द : समाज का दर्पण और साहित्य का शिल्पी हिंदी साहित्य की दुनिया में यदि किसी लेखक को यथार्थ का सबसे सशक्त और व्यापक चित्रकार कहा जाए तो वह मुंशी […]