‘कितने पाकिस्तान’ इतिहास का पुनराख्यान – डॉ. चन्दन कुमार

कमलेश्वर ने ‘ कितने पाकिस्तान ‘ के विराट कथ्य में जहाँ एक ओर पौराणिक या पुराकथाओं का प्रयोग कर साहित्य और लोक प्रचलित इतिहास में मिथकों की परम्परा और प्रयोग […]

मुंशी प्रेमचंद जी के उपन्यासों में वर्णित विषम दाम्पत्य जीवन (गोदान, निर्मला, वरदान, सेवा सदन और प्रतिज्ञा उपन्यासों के आधार पर – डॉ. हरिन्दर कुमार

भारतीय चिंतन में विवाह को एक पवित्र एवं पुण्य संस्कार के रूप में स्वीकार किया गया है। यह मानव को दायित्ववान और परिपक्व बनाने के लिए आवश्यक है। सरल शब्दों […]

धम्म-सेतु (कविता) – प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार सिंह

धम्म-सेतु, धरा और धम्म का संगम भारत-नेपाल की साझा बौद्ध विरासत लुम्बिनी की पवित्र प्रात में, उभर रहा सेतु, सौगात में। भारत की वाणी, बुद्ध की राह, फिर जग में […]

प्रो. पंढरीनाथ पाटील “शिवांश “ की कविताएं

ईमान.. छीनी जा रहीं हैं मुझसे मेरी कविता, काग़ज़ और लेखनी भी! जी बिल्कुल, उनकी ही तरह! उन्हें बचानी हैं नौकरी, या कुछ कमाना भी होगा! मेरा क्या कवि हूँ, […]

दृष्टिकोण (कहानी) – डॉ० उपासना पाण्डेय

दृष्टिकोण (कहानी) सुनैना असहनीय पेट दर्द के कारण जब अस्पताल पहुँची तो उसे पता चला कि उसकी किडनी २० प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है। अतएव उसे स्वरूपरानी चिकित्सालय में […]

‘द वॉर दैट मेड रॉ’ पुस्तक की समीक्षा – अमन शर्मा

प्रस्तावना  द वॉर दैट मेड रॉ नामक पुस्तक, लेखक अनुषका नंदकुमार एवं संदीप साकेत द्वारा लिखी गई है, जिसमें आधुनिक भारत के खुफिया तंत्र के उद्भव, विशेष रूप से अनुसंधान […]

संपादकीय

प्रेमचन्द : समाज का दर्पण और साहित्य का शिल्पी हिंदी साहित्य की दुनिया में यदि किसी लेखक को यथार्थ का सबसे सशक्त और व्यापक चित्रकार कहा जाए तो वह मुंशी […]

अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका संपादकीय  डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय शोधार्थी प्रेमचंद की कहानी ‘लांछन’ में अभिव्यक्त जेंडर परफॉर्मेटिविटी और नैतिक पुलिसिंग – जयकृष्णन एम. ‘गोदान उपन्यास ग्राम-जीवन और कृषि-संस्कृति का सशक्त महाकाव्य है’ […]

प्रेमचंद की कहानी ‘लांछन’ में अभिव्यक्त जेंडर परफॉर्मेटिविटी और नैतिक पुलिसिंग – जयकृष्णन एम.

शोध सारांश मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘लांछन’ एक महिला आश्रम की पृष्ठभूमि में रची गई एक ऐसी कहानी है, जो जेंडर भूमिकाओं, सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत शक्ति की जटिलताओं को […]

‘गोदान उपन्यास ग्राम-जीवन और कृषि-संस्कृति का सशक्त महाकाव्य है’ – डॉ. शेख शहनाज अहमद

‘गोदान’ मुंशी प्रेमचंद का अंतिम पूर्ण उपन्यास है, जिसमें ग्राम जीवन और कृषि संस्कृति का चित्रण किया गया है। ‘होरी’ कृषक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। होरी का जीवन आर्थिक […]