साहित्य संबंधी प्रेमचन्द की चिन्तन दृष्टि – ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह 

हिन्दी साहित्य के अविस्मरणीय एवं लोकप्रिय लेखक प्रेमचन्द जी ने हिन्दी में कहानी और उपन्यास को सुदृढ़ नींव प्रदान की और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी चित्रण से देशवासियों का दिल जीत लिया। […]

यशोधरा : समय सापेक्षता – डॉ. रूचिरा ढींगरा

भारतीय संस्कृति और भारतीयता के प्रखर उद्घोषक मैथिलीशरण गुप्त    (3 अगस्त 1886-12 दिसंबर 1964)  हिन्दी आधुनिक हिंदी साहित्य में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनके द्वारा सृजित महत्वपूर्ण कृतियां हैं- […]

मध्ययुगीन समाज : मीरा – विश्वम्भर दत्त काण्डपाल / डॉ. टी. एन. ओझा

मध्यकाल अपने समय और सरोकारों के साथ एक ऐसा काल है जो, मध्यकालीन रूढ़ियों से जकड़ा हुआ है। ऐसा स्वीकार किया जाता है कि समाज, मनुष्य और साहित्य का आपस […]

बाज़ारवादी ताकतों के बरक्स राहुल-अंजली की मानवीय संवेदना एवं उनकी प्रेम-कथा – डॉ. मीनाक्षी सिंह

कहीं सुना है कि Every girl wants a bad boy, who will be good just for her … and … Every boy wants a good girl who will be bad […]

रहीम कृत दोहावली में उनकी प्रेम विषयक दृष्टि – रेखा

अकबरी दरबार के कवियों में रहीम (1556-1638) का विशेष स्थान है । ये बैरम खां खानखाना के पुत्र थे और इनकी माँ हुमायूँ की पत्नी की छोटी बहन थी । […]

मीडिया का बदलता स्वरूप – डॉ. माला मिश्रा

संचार माध्यम अथवा मीडिया का स्वरूप तेजी से इस प्रकार बदलता दिखाई दे रहा है है कि इस पर काले बादल मंडराते दिखाई दे रहे है|  अतः यह कर पाना […]

संघर्ष और उसकी युग-सापेक्षता – डाॅ. ममता सिंगला

संघर्ष किसी एक युग-विशेष की ही माँग नहीं है वरन् उसकी सार्थकता सभी युगों में स्वयं सिद्ध है, क्योंकि कुछ सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक तथा आर्थिक समस्याएँ ऐसी हैं, जो प्रत्येक […]

स्वाधीनता, आधुनिकता, ग्राम जीवन और परिवर्तन की चेतना का यथार्थ – राम विनय शर्मा

सन् 1967 में प्रकाशित शिवप्रसाद सिंह का ‘अलग अलग वैतरणी’ ग्रामभित्तिक उपन्यासों की चर्चा के प्रसंग में उल्लेखनीय स्थान रखता है। इस उपन्यास का आयतन बड़ा है, पात्रों की संख्या […]

बदलते वक्त में ‘कुदाल’ – बीरज पाण्डेय

केदारनाथ सिंह ‘भारतीयता’ के कवि हैं । उनकी कविताओं में एक साथ भारतीय जीवन के विविध पहलू सिमटे मिलते हैं। बदलते भारत के कैनवास के रंगों में, सजधज में आए […]

कृषक जीवन की समकालीन चुनौतियाँ – प्रभात यादव

कृषि भारतीय जीवन का आधार, रोजगार का प्रमुख स्रोत तथा विदेशी मुद्रा अर्जन का प्रमुख माध्यम है। लेकिन आज भारतीय कृषि के समक्ष बहुत सी चुनौतियाँ हैं। पहले की तुलना […]