
संघर्ष किसी एक युग-विशेष की ही माँग नहीं है वरन् उसकी सार्थकता सभी युगों में स्वयं सिद्ध है, क्योंकि कुछ सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक तथा आर्थिक समस्याएँ ऐसी हैं, जो प्रत्येक […]

संघर्ष किसी एक युग-विशेष की ही माँग नहीं है वरन् उसकी सार्थकता सभी युगों में स्वयं सिद्ध है, क्योंकि कुछ सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक तथा आर्थिक समस्याएँ ऐसी हैं, जो प्रत्येक […]

सन् 1967 में प्रकाशित शिवप्रसाद सिंह का ‘अलग अलग वैतरणी’ ग्रामभित्तिक उपन्यासों की चर्चा के प्रसंग में उल्लेखनीय स्थान रखता है। इस उपन्यास का आयतन बड़ा है, पात्रों की संख्या […]

केदारनाथ सिंह ‘भारतीयता’ के कवि हैं । उनकी कविताओं में एक साथ भारतीय जीवन के विविध पहलू सिमटे मिलते हैं। बदलते भारत के कैनवास के रंगों में, सजधज में आए […]

कृषि भारतीय जीवन का आधार, रोजगार का प्रमुख स्रोत तथा विदेशी मुद्रा अर्जन का प्रमुख माध्यम है। लेकिन आज भारतीय कृषि के समक्ष बहुत सी चुनौतियाँ हैं। पहले की तुलना […]

‘भ्रमरगीत शब्द ‘भ्रमर’ और ‘गीत’ दो शब्दों से मिलकर बना है भ्रमर काले रंग का उड़ने वाला जन्तु होता है जिसे मधुप, मधुकर, अलि आदि विविध नामों से पुकारा जाता […]

आधुनिक युग का दौर प्रतियोगिताओं का दौर है। हर तरफ प्रतियोगिता ही प्रतियोगिता है। मनुष्य को इस तनाव, चिन्ता व प्रतियोगिता के दौर में जीने व इसके साथ चलने के […]

मानसिक दृढ़ता मनुष्य के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। इसके द्वारा वह किसी भी क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर सकता है। विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य की मानसिक दृढ़ता […]

राष्ट्रवाद मूल रूप से एक सांस्कृतिक अवधारणा है। राष्ट्रवाद का स्वरूप उस राष्ट्र की धर्म और संस्कृति के द्वारा निर्धरित होता है। भारत में अनादिकाल से ही धर्म मनुष्य के जीवन का प्राणतत्त्व रहा […]

विद्यासागर नौटियाल जी यथार्थवादी लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। प्रेमचन्द की लेखन परम्परा के समान ही नौटियाल जी की भी लेखन कला है। वह भी प्रेमचन्द की […]

शमशेर प्रयोगशील कवि हैं जो प्रयोगवाद से चलकर प्रगतिवाद की और आकर्षित हुए फिर नई कविता से जुड़े है। अपनी स्वगत संलाप शैली में कविता करना उनके कवित्व को उनके […]