
सारांश: भारतीय स्वतंत्रता-आंदोलन में कस्तूरबा गाँधी के योगदान को भारतीय स्त्रियों के योगदान में शीर्ष में गिना जाता है। बा की प्रेरणा और उनके त्याग-समर्पण की भावना के परिणामस्वरूप हम […]

सारांश: भारतीय स्वतंत्रता-आंदोलन में कस्तूरबा गाँधी के योगदान को भारतीय स्त्रियों के योगदान में शीर्ष में गिना जाता है। बा की प्रेरणा और उनके त्याग-समर्पण की भावना के परिणामस्वरूप हम […]

(ग्रियर्सन ने ‘द मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑफ हिन्दुस्तान‘ में तुलसीदास पर जो अपने आलोचनात्मक विचार रखे हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी दृष्टि पूरी तरह ‘औपनिवेशिक‘ ही रही […]

सारांश पंजाबी साहित्य में गुरु नानक देव का अग्रणीय स्थान है। उनका जन्म 15 अप्रैल (1469 ई.) तलवंडी नामक गाँव में हुआ था, वह आज का पाकिस्तान है। गुरु […]

‘दुनिया में सिर्फ वही लोग खुश रह सकते हैं जो जिंदगी को बगैर किसी पसोपेश के और बगैर सवालात किए मंजूर कर लें | हम जितने ज्यादा सवालात करते हैं, […]

‘भया कबीर उदास’ उषा प्रियंवदा द्वारा रचित एक बहुचर्चित उपन्यास है। यह उपन्यास कैंसर जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारी से लड़ती एक युवती की हिम्मत भरी दास्तान है, जो हर एक […]

भारतेंदु हरिश्चंद्र सफल संपादक, कवि, उपन्यासकार, अनुवादक एवं नाट्यकार हैं। उनका साहित्य मोटे तौर पर सन् 1858-1885 के बीच एक ऐसे ऐतिहासिक काल की उपज है, जिसके एक छोर पर […]

साहित्य जीवन के विविध प्रकल्पों के साथ परिवेश के विविध रूपों की अन्तर्क्रिया का साक्षात्कार कराता है, जिससे मनुष्यों की भविष्यधर्मी जीवनाकांक्षाओं का आधारपथ निर्मित होता है। मनुष्य के जीवन […]

लोक-संस्कृति लोक-मानस की सहज अभिव्यक्ति है। लोक-संस्कृति ही किसी जाति या प्रदेश के अस्तित्व की परिचायक है जिससे उसके संपूर्ण विश्वास एवं परपंराएँ प्रतिबिंबित होती हैं। लोक-संस्कृति की व्यापक अवधारणा […]

भारत के सांस्कृतिक क्षितिज पर भक्ति आंदोलन का उदय एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। क्योंकि इसकी व्याप्ति किसी एक क्षेत्र या भाषा विशेष तक सीमित नहीं थी। अलग-अलग समय में […]

ऋंगवेरपुर के राजा गुहराज निषाद को संसार भगवान श्रीराम सखा के रूप में जानता है । गुहराज निषाद जी को कहार, भील, केवट, मल्लाह, मांझी, कश्यप आदि समाज के लोग […]