संवेदनशील महाकवयित्री : महादेवी वर्मा – डॉ. ममता देवी यादव

जीवन के करुणभाव को अभिव्यक्त करने वाली, रचनाओं में संवेदनशीलता को अमूल्यभूत आधार देने वाली कवित्री महादेवी वर्मा के नाम से जाना जाता है |महादेवी वर्मा छायावादी कवित्री के रूप […]

महादेवी का नारी विषयक दृष्टिकोंण – डाॅ. क्षमा सिसोदिया उज्जैनी

महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवियित्री थीं। रहस्यवादी चिन्तन की प्रधानता के कारण महादेवी का नारी चित्रण अनुभूति प्ररक हो गया है।उन्होंने नारी के मातृत्व,करूणा और आत्मसमर्पण की भावना को […]

महादेवी वर्मा के काव्य की विशेषताएं – प्रा. डॉ. विष्णु गोविंदराव राठोड 

महादेवी  वर्मा छायावाद की कवयीत्री है । उनके के काव्य में रहस्यवाद दिखाई देता है इसलिए महादेवी वर्मा को  आधुनिक मीरा कहा जाता है । अतः उनके काव्य में आत्मा […]

महादेवी वर्मा के काव्य में संवेदना – डॉ. भगत गोकुल महादेव 

महादेवी वर्मा छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती है निराला ने हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती की कहां है छायावाद के कवियों ने अपने […]

महादेवी वर्मा : असाधारण काव्य में साधारणीकरण – डॉ. मनीष कुमार जैन

समय बदला, परिस्थितियाँ बदलीं, विमर्श बदले, किन्तु साधरणीकरण का महत्व कम नहीं हुआ। साधरणीकरण की अवधारणा किसी-न-किसी रूप में अखिल विश्व की साहित्यिक परंपराओं में विद्यमान रही। शब्दों व प्रस्तुतीकरण […]

महादेवी वर्मा का काव्य शिल्प – डॉ. संतोष कुमार पांडेय

शिल्प शब्द का अर्थ है निर्माण अथवा बनावट। साहित्य के संदर्भ में किसी रचना के निर्माण अथवा उसकी बनावट में जिस जिस सामग्री का उपयोग होता है उसे शिल्प के […]

एक नज़र महादेवी वर्मा पर – डॉ. सौ. तेजल मेहता

हिंदी साहित्य  जगत  आदिकाल से आधुनिक काल तक कई ‘वादो’  में फैला है किंतु जिस काल में भावुकता ,कल्पना ,मुक्ति की कामना ,रूढ़ियों के प्रति विद्रोह ,नवीन मूल्यों की स्थापना […]

महादेवी की कविता में विरह-वर्णन – प्रियंका भाकुनी

महादेवी वर्मा छायावाद की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रही हैं। जिन्होंने अपने विशिष्ट सृजन के माध्यम से अनुभूति का सूक्ष्म चित्रण किया है। उनका लेखन दार्शनिक गंभीरता के साथ-साथ करूणा और प्रेम  […]

महादेवी वर्मा की गद्य शैली – डॉ. प्रीतम सिंह शर्मा 

उन्नीसवीं शताब्दी में हिन्दी गद्य का समुचित विकास हुआ। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में भारतेंदु काल में हिन्दी गद्य ने व्यवस्थित रूप धारण किया। हिन्दी साहित्य में सामान्यतः गद्य के […]

महादेवी वर्मा के काव्य में विरहानुभूति – डॉ. गरिमा जैन

प्रत्येक भाषा के साहित्य में कुछ ऐसी कालजयी रचनाएं एवं रचनाकार होते हैं जो अपनी विषयवस्तु और वर्णन शैली के कारण न केवल जन मानस को प्रभावित करते हैं बल्कि […]