कबीर के काव्य का संदेश – डाॅ. सरिता देवी

कबीर ने अनुभव की पाठशाला में जीवन की शिक्षा ली थी। उस समय का समाज मानवता की कब्र पर पल्लवित और पोषित हो रहा है । सामंतवाद का बोलबाला था, […]

हिंदी साहित्य के इतिहास में कबीर की प्रासंगिकता –  विशाल कुमार सिंह

हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में कबीर इकलौते ऐसे कवि हैं , जिन्होंने अपना समस्त जीवन लोक-कल्याण हेतु समर्पित किया था । वे आजीवन समाज में व्याप्त आडम्बरों पर अपनी तीव्र […]

कबीर और आज – डॉ. स्वप्निल यादव

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक आदमी के पास दूसरे के लिए वक्त नहीं है।  रिश्ते ही आपस में एक दूसरे के लिए स्थान ढूंढ रहे हैं उस समय […]

झीनी- झीनी बीनी चदरिया रे – सविता प्रथमेश

किस बला का नाम है कबीर! कभी पंडितों की आलोचना कर रहा है तो कभी मुल्लाओं की.किसी को नहीं छोड़ा.यहां तक कि कमाल को भी. कमाल..अपने बेटे को भी.. जिस […]

कबिरा खड़ा बजार में – कृष्णानन्द

कबीरदास हिंदी साहित्य के मध्यकाल में उत्पन्न ऐसे व्यक्ति हैं , जो एक ही साथ संत हैं , फ़क़ीर हैं ,गृहस्थ हैं,समाज सुधारक हैं और एक उच्च कोटि के कवि […]

 कबीर की आवश्यकता और मूल्यांकन – निशि उपाध्याय

कबीर जो सदैव आलोचकों के केंद्र में रहे हैं  | जहाँ साहित्यिक जगत में न जाने क्यों कबीर  की रचनाओं को लेकर खींचतान की जा रही है | कबीर को […]

कबीर के काव्य में लोक संचार भावना – डॉ. चन्देश्वर यादव

कबीर क्रान्ति के अग्रदूत हैं जिन्होंने कुव्यवस्था में भूचाल ला दिया और एक नए युग का सूत्रपात किया। कबीर ने अंधविश्वास पाखण्ड और आडंबर को जड़ से हिलाते हुए समाज […]

कबीर के काव्य का संदेश – डाॅ. सरिता देवी

कबीर ने अनुभव की पाठशाला में जीवन की शिक्षा ली थी। उस समय का समाज मानवता की कब्र पर पल्लवित और पोषित हो रहा है । सामंतवाद का बोलबाला था, […]

कबीर-काव्य: मूल्य और प्रासंगिकता – कमलेश चौधरी

मध्ययुग के सामाजिक, धार्मिक व राजनैतिक परिदृश्य पर हम यदि नजर डाले तो पाते हैं कि इन तीनों ही क्षेत्रों में तत्कालीन परिस्थितियँा मूल्यों के लिए तरस रही थी। जन-सामान्य […]

कबीर की काव्य संवेदना और आधुनिक बोध – मोहिनी पाण्डेय

कबीर मध्यकाल के निर्गुण विचारधारा के कवि हैं । आधुनिक काल में कबीर का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता हैं धार्मिक कल के कबीर अकेले कवि हैं ,जिन्होंने  […]