खींचो न हाथ बंधु (कहानी) – डाॅ. प्रियंका

क्या कभी किसी ने इक्कीसवीं सदी में जीते हुए, नई-नई टेक्नोलाॅजी के दौर में सोचा था कि घरों के अंदर रहते हुए भी मास्क लगाने पड़ सकते हैं। रेस्टोरेटं, डांस […]

‘…बुधिया’ अंतिम नहीं थी ( कहानी ) – डॉ. मधुलिका बेन पटेल 

भोरहरी में उठते ही रंजना खेत से लायी ताजी हरी भिंडियाँ काटने बैठ गयी। रोज सबसे पहला उसका यही काम था। उजाला होते ही सूरज की किरणें भी धीरे-धीरे धरती […]

फांसी सजा नहीं ( कविता ) – मीनाक्षी

जब हमारे समाज में होते हैं अपराध कई तरह के जिसके लिए होते हैं कई तरह के प्रदर्शन भी कैंडल मार्च धरना प्रदर्शन या अन्य कोई जहां लोग लगाते हैं […]

वे आंखें (कविता) – राखी राठौर

झील-सी नीली आंखें तो बहुत देखी जा चुकी देखने की जरूरत है, उन गहरी काली अंधेरे से भरी झुर्रियों से घिरी आंखों को जो दिखाती हैं, उनके संपूर्ण जीवन की […]

गुड़िया रानी की कहानी (कविता) – प्रीति बिडलान

जन्म लिया जिस दिन उसने सबने कहा धन पराया उसे आ गई बोझ पिता पर कहकर दुनिया ने दुत्तकारा सीखो अदब, जाना है तुम्हें दुसरे घर बचपन में ही सिखलाया […]

हेमन्त कुमार बिनवाल की कविताएं

(1) झंझावातों  से विद्रोही बनकर लड़ना सीखो, अपने देश के लिए भक्ति तुम करना सीखो | छोटी-छोटी बातों पर मत लड़ना सीखो, छोटी-छोटी भूलों से तुम कुछ करना सीखो | […]

सफर के राहगीर (कहानी) – सारिका ठाकुर

दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेज कैंपस में फॉर्म भरने और नामांकन की भागमभाग हलचल थी और अधिति पूर्व दिशा में पेड़ की छांव तले एकांत में बैठी मन की गुत्थियां सुलझाने में […]

किरन त्रिपाठी की कविताएं

These are feelings of Soldiers जो लौट के घर न आए….. तिरंगे में लिपट कर ,जाते-जाते बहुत सारी अनकही बातें कह गए….   (1) सैनिक की चाहत “चाहत तो बहुत […]

राकेश धर द्विवेदी की कविताएं

1. सुनो नकाबपोश चारों तरफ दिख रहे हैं दुनिया में नकाब लगाए लोग आपसे मिलने, बतियाने से हाथ मिलाने से घबराते हुए जल्दी से किनारे से निकलकर मुँह छिपा कर […]

महावीर सिंह रावत की कविताएं

1. घर जलता रहा और वे ज़िद पर अड़े रहे, संभाल ना सके चार मित्र भी, और वे अनजान भीड़ में पड़े रहे, बड़ा गुमान था हमें इस बात का […]