अमृतलाल नागर और कथा संसार – अतुल वैभव

अमृतलाल नागर हिंदी गद्य साहित्य के उन शिखर पुरुषों में गिने जाते हैं जिनके गद्य से हिंदी साहित्य ही नहीं बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं का साहित्य भी समृद्ध हुआ है। […]

द्विभाषिकता एवं बहुभाषिकताः संदर्भ एवं प्रकृति – श्वेतांशु शेखर

भाषा का आविष्कार मनुष्य की महानतम उपलब्धियों में से एक है। मनुष्य ने इसके महत्त्व को हजारों-लाखों वर्ष पूर्व पहचान लिया था, इसलिए इसके विकास के लिए प्रयत्नशील रहा। भाषा […]

पंखुरी सिन्हा की पाँच कविताएँ

कारण प्रेम कारण से परे होता है लेकिन कारण से परे हर कुछ प्रेम नहीं होता प्रेम की लाश ढ़ोने वाले बहुत हैं इतने हैं कि दूर नहीं जाने देंगे […]

हाँ मैं प्रसिद्ध होना चाहती हूँ – कुमारी अर्चना

क्या करना होगा अपना चेहरा रोज रोज गमकऊँआ साबुन से चमकाना होगा फेरनलवली खूब पोतना होगा सात धंटे की पूरी नींद लेनी होगा फिर फेसबुक,इन्ट्राग्राम पर हॉट,सेक्सी व भड़काऊं फोटो […]

पिंजरे की चिड़िया – स्वाति कुमार

पिंजरे  में  कैद  एक  चिड़िया, संसार के यथार्थ से अनजान, दूसरों के अरमानों के पीछे, अपने सपनों को कुचलती एक चिड़िया, पिंजरे में कैद एक चिड़िया।   चारदीवारी में पंख […]

मैं रूठा हूँ – सुषमा सिंह

पापा को ऑफिस की जल्दी माँ तुम भी तो जाती छोड़ दादी नानी कोई न संग में बोलो मुझे संभाले कौन मैं डरता हूँ माँ सपनों में तुमको नहीं बताता […]

प्रेरणा (लघुकथा) – मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

पवन एक अच्छी कद – काठी का छात्र था | वह भारतीय सेना में जाना चाहता था, इसलिए दिन – रात जी तोड़ मेहनत की थी उसने, वैसे पढ़ने – […]

औरत, औरत की दुश्मन – अमन कौशिक

हर शाम की तरह आज भी ऑफिस से आने के बाद घर का वही माहौल था। सब बैठ कर, एक टीम बना कर इधर उधर की बातें कम और चुगलियां […]

हिंदी का लोक व्यवहार – डॉ. ममता सिंगला

आदि मानव की विकास परम्परा का आधार मूलभूत आवश्यकता के अतिरिक्त भाषा भी मुख्य आधार रहा है । क्योंकि भाषा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति […]

आधुनिक कविताओ में विचारों का संप्रेषण :मिथक – डॉ .मोनिका देवी

आधुनिक कविता में जटिल विचारों के संप्रेषण के लिए मिथक का व्यापक प्रयोग किया गया l आचार्य हजारी प्रसाद दिव्वेदी ने अग्रेज़ी के( myth )शब्द के समानार्थी के रूप में […]