जब हमारे समाज में

होते हैं अपराध

कई तरह के

जिसके लिए होते हैं

कई तरह के

प्रदर्शन भी

कैंडल मार्च

धरना प्रदर्शन

या अन्य कोई

जहां लोग लगाते हैं गुहार

सरकार से

सजा फांसी की

यह सोचकर

ना हो वो दुबारा कभी

और मिले इंसाफ

उनको भी

पर  फिर भी  होते हैं

ऐसे अपराध

इतनी अमानवीयता के साथ

जिसे सुन कांप जाती

हमारी रूह भी

वे होते हैं

और अधिकता के साथ

जिसका समाधान

ना हुआ अभी

शायद रह गई

कोई कमी

किंतु

इसके लिए फांसी

सजा नहीं

कभी नहीं

इससे बड़ी सजा

जीवन है कहीं

 

मीनाक्षी
शोधार्थी
हिंदी विभाग
दिल्ली विश्वविद्यालय

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