1. तू सबला है

तेरे आँचल से अमृत पीकर
संसार पनपता खिलता है
प्रेम त्याग उपनाम हैं तेरे
गंगा सी शीतलता है
कर पन्ना धाय को कोटि नमन
अपनी शक्ति पहचान ले
तू सबला है मान ले

लक्ष्मी हो, अन्नपूर्णा हो
तुझसे ही घर सजता है
चट्टानों सी दृढ़ता तुझमें
धैर्य धरा सा बसता है
कर माँ सीता को कोटि नमन
अपनी शक्ति पहचान ले
तू सबला है मान ले

काम नहीं है कोई मुश्किल
गर तू मन में ठान ले
इतिहास साक्षी है इसका
बात यह तू भी जान ले
कर सती सावित्री को कोटि नमन
अपनी शक्ति पहचान ले
तू सबला है मान ले

जिन हाथोँ में मेंहदी सजती
चूड़ी खनक-खनक खनके
शस्त्र उठा वह सकते हैं
ऐसा अवसर जो आन पड़े
कर लक्ष्मीबाई को कोटि नमन
अपनी शक्ति पहचान ले
तू सबला है मान ले

दफ़्तर के बोर्डरूम से
खेलकूद के परिसर तक
देश सुरक्षा की टुकड़ी से
अंतरिक्ष अन्वेषण तक
तेरा लोहा सबने माना
तू भी यह सच जान ले
तू सबला है मान ले

 

२. कैसे सुन्दर तस्वीर बनाऊँ

सजनी कैसे तेरी मैं
सुन्दर तस्वीर बनाऊँ
तेरी शान में प्यार भरा
कैसे गीत सुनाऊँ

कभी कहीं गोले फटते हैं
अकस्मात् गोली चलती हैं
मांग कोई सूनी हो जाती
हाथों की चूड़ी दरकी हैं
सुर्ख रंग हर ओर बिछा है
दूजा रंग कहाँ से लाऊँ
सजनी कैसे तेरी मैं
सुन्दर तस्वीर बनाऊँ

हरा-भरा खुशहाल चमन
पल में उजड़ जाता है
शहरों की धमनी में बहता
रक्त सिहर जाता है
शोर मचाता है सन्नाटा
कैसे कोई साज़ बजाऊँ
सजनी कैसे तेरी मैं
सुन्दर तस्वीर बनाऊँ

दिन भी काले-काले हैं
रातें भी गहराई हैं
नन्ही गुड़िया की चीखें
दीवारों से टकराई हैं
बिखरी है सरगम की माला
गीत सुरीले कैसे गाऊँ
सजनी कैसे तेरी मैं
सुन्दर तस्वीर बनाऊँ

आलोक मिश्रा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *