पंजाबी सिनेमा में महिलाओं की भूमिका – तेजस पूनिया 

बॉलीवुड की पहली फ़िल्म आलम आरा बनने के कुछ वर्ष बाद ही पंजाबी सिनेमा भी बनने लगा था। अगर बात करें पहली पंजाबी फिल्म की तो सबसे पहले पंजाबी भाषा […]

‘हल्की गुलाबी’ – गुलाबो सिताबो – तेजस पूनिया

कोरोना वैश्विक महामारी के दौर में गुलाबो सिताबो पहली फ़िल्म बन गई है जो सीधा ओ टी टी प्लेटफॉर्म (अमेजन) पर रिलीज की गई है। अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना […]

बेहतरीन मगर बेअसर ताना जी – तेजस पूनिया

यह एक ऐतिहासिक फ़िल्म है। जो अच्छी तरह से किक मारती है, बीच में फड़फड़ाती है और फिर चरमोत्कर्ष में कुछ अच्छे घूंसे मारती है। पीरियड ड्रामा या ऐतिहासिक थकान […]

साल 2019 की फ़िल्में कौन कितना पानी में – तेजस पूनिया

साल 2019 में लगभग 100 से भी ऊपर फ़िल्में रिलीज हुई। कुछ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती नजर आईं तो कुछ ने दिलों में जगह बनाने की कोशिश की। आज […]

समालोचना/आलोचना: वीरे दी वेडिंग – डॉ. विदुषी शर्मा

यह एकता कपूर की एक  चर्चित फिल्म है |  इस फिल्म के बारे में बहुत सी सकारात्मक बातें हैं, बहुत से सकारात्मक सुखांत हैं। इसी के साथ – साथ इतने […]

महिला फिल्मकारों की फिल्मों में स्त्री छवि और बदलता दृष्टिकोण – अंतिमा सिंह

पुरुष वर्चस्ववादी समाज में आज भी महिलाओं की दुनिया घर की चारदीवारी के भीतर सिमट कर रह जाती है।ऐसे वातावरण में महिला फिल्मकारों द्वारा उस चारदीवारी को तोड़कर पितृसत्तात्मक समाज […]

अभिनेता के रूप में भीष्म साहनी – मो. वासिक

भीष्म जी के अन्दर अभिनय के प्रति अभिव्यक्ति की भावना स्कूल के दिनों में जागृत हुई थी, जब भीष्म चैथी कक्षा में थे, तब उन्होंने स्कूल में खेले गये नाटक […]

सिनेमा का भाषिक और सामाजिक अध्ययन (विशेष संदर्भ नसीरूद्दीन शाह अभिनीत फिल्में)-डॉ. माला मिश्र

 पिछली सदी शुरू होने से पूर्व ही जब देश अपनी स्वतन्त्रता पाने की ओर अग्रसर था और देश में राजनैतिक और सामाजिक सुधार का व्यापक दौर चल रहा था, उसी […]

सिनेमा के कैनवास का लोक रंग – अर्चना पाठक

लोकाचार या लोकजीवन भारत जैसे ग्राम्य आधारित समाज का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसकी पैठ समाज की अन्तर्षिराओं में रक्त की भाँति है। इस दृष्टि से हिन्दी सिनेमा के […]