मोक्ष (कहानी) – राजेश कमल

“बिशेश्वर| ऐ भाई बिशेश्वर! कौना सोच में डूबे हो भैया?” “कुछ नहीं |” अनमने से बिशेश्वर ने बात टाल दी। “चाह पियोगे?” जरनैल सिंह ने बात पलट दी| बिशेश्वर ने […]

ग्लानि – सविता मिश्रा ‘अक्षजा’

“अच्छा हुआ बेटा जो तू आ गया | तेरे बाबा तेरे घर से जब से लौटे है गुमसुम रहते हैं| क्या हुआ ऐसा वहाँ?” “कुछ नहीं अम्मा!” “कुछ तो हुआ […]

त्राहिमाम हूजूर (कहानी) – समीर कुमार

राज के समय के जिलों की भौगोलिक सीमाएं आज के दौर के मण्डलों या प्रमंडलों से भी अधिक फैली थीं और जिला मजिस्ट्रेट का पद मूल रूप से अंग्रेजी के […]

पूर्णिमा वत्स की कविताएँ

व्यर्थ –व्यथा कितने व्यर्थ रहे तुम जीवन  खुद को भी न पुकार सके?   2.  दुख किसी विशाल बरगद सा सिरहाने उगा है दुख उसे कहाँ लगाऊं कि कुछ कम […]

कल्याणी ( कहानी ) – तेजस पूनिया

दुःख सुख का ये संगम है… मेरा गम कितना कम है… लोगों का ग़म देखा तो… पास से गुजर रहे ऑटो रिक्शा में यह गाना बज रहा था और मैं […]

राकेश धर द्विवेदी की कविताएँ

(क) ऋण वैसे तो दोनों का नाम श से प्रारम्भ होता था एक शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता था और दूसरा शोषक वर्ग का दोनों ने ही ऋण लिया था […]

शहर जो आदमी खाता है – तेजस पूनिया

एक बड़ी दानवाकार कृति मेरे ऊपर आ बैठी है और एक विराट स्वरूप धारण करती जा रही है । अचानक मैं उठ बैठा पसीने से तरबतर । आज मुझे पूरे […]

लव कुमार ‘लव’ की कविताएँ

(क) उद्घोष  न्याय की आंखों पर बंधी पट्टी का पक्षपात के रोग से ग्रसित होना कानून की देवी के तराजू का कम्पन किसी उद्घोष की आहट है किसी क्रांति का […]

विन्ध्य प्रकाश मिश्र की कविता

आंगन के कोनो में आकर ची ची गीत सुनाती थी चावल के  दाने पाकर पूरा परिवार बुलाती थी। मीठी मीठी मधुर स्वरों में गुनगुन गीत गाती थी। गौरेया आंगन में […]

कृष्णार्जुन संवाद – कृष्णानंद

(भाग-1)   धृतराष्ट्र बोले संजय से क्या हुआ कुरुक्षेत्र में? पाण्डुपुत्रों और मेरे पुत्रों के बीच में? देखा सजंय ने दिव्यदृष्टि से ,दुर्योधन खड़े द्रोण के पास। कह रहे देखो […]