
विकास और राष्ट्र के नाम पर उपजे मौसमी पक्षकारों की जमात की पैन्तरेबाजी से जनता बस ‘सक्रिय-मूकदर्शक’ बनाई जा रही है !! आज सरहद की सुरक्षा में लगे सैनिकों के […]
विकास और राष्ट्र के नाम पर उपजे मौसमी पक्षकारों की जमात की पैन्तरेबाजी से जनता बस ‘सक्रिय-मूकदर्शक’ बनाई जा रही है !! आज सरहद की सुरक्षा में लगे सैनिकों के […]
न्यू मीडिया का मतलब मीडिया के क्षेत्र में कुछ नयापन से है…. इसमें प्रतिदिन कुछ न कुछ जुड़ता ही चला जा रहा है.. अगर थोड़ा पीछे मुड़ कर देखे तो […]
रीतिकालीन साहित्य को न्यू मीडिया से जोड़कर देखना कहीं न कहीं अजीब भी लग सकता है लेकिन इन दोनों की पारस्परिकता पर ध्यान दें तो वह महत्वपूर्ण भी लगता है। […]
भारत जैसे दो-तिहाई निरक्षर देश में मानव अधिकारों की रक्षा में मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्रीय मानव अधिकारों की सर्वमान्य घोषणा की थी […]
बिहार पर्यटन प्राचीन सभ्यता, धर्म, इतिहास और संस्कृति का अनुठा मेल है, जो भारत की पहचान है। यह राज्य भारत के कुछ महान सम्राज्यों जैसे मौर्य, गुप्त और पलस के […]
समस्त सृष्टि की जिज्ञासा-जनित अनुभूतियों की तथ्यपरक और आदर्शोन्मुख – यथार्थ की अभिव्यक्ति जनसंचार की अनिर्वायता है। समकालीन सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं मानवीय गतिविधियों एवं विचारधाराओं को प्रतिबिम्बित और […]
इंटरनेट का एक हिस्सा हमारी ज़िन्दगी का बहुत बड़ा हिस्सा बन चुका है या बनता जा रहा है। इस हिस्से को सोशल साइट्स के नाम से जाना जाता है। फ़ेसबुक, […]
भारत की अवधारणा एक ऐसे राष्ट्र की अवधारणा हैं जिसके लिए संघर्ष को निर्माण का आधार रूप में कभी स्वीकार नहीं किया गया. यहाँ आदि काल से ही चिंतन को […]
सोनू निगम ने १६ अप्रैल को तीन ट्विट किये जिनमें एक धर्म विशेष की प्रार्थना पद्धति पर सवाल था और सवाल भी समस्या की मुद्रा में था| ऐसा सवाल जो […]
संस्कृति शब्द का सम्बन्ध संस्कार से है जिसका अर्थ है संशोधन करना, उत्तम बनाना, परिष्कार करना। संस्कार व्यक्ति के भी होते है, जाति के भी। जातीय संस्कारों को ही संस्कृति […]