
हिंदी साहित्य के इतिहास में कबीर एक ऐसे प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति हैं जिनकी प्रासंगिकता आज भी विद्यमान है। उनके जिक्र मात्र से हमारे समक्ष वही मध्ययुगीन पतनोंन्मुख समाज का चित्र […]

हिंदी साहित्य के इतिहास में कबीर एक ऐसे प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति हैं जिनकी प्रासंगिकता आज भी विद्यमान है। उनके जिक्र मात्र से हमारे समक्ष वही मध्ययुगीन पतनोंन्मुख समाज का चित्र […]

सामान्यतः सामाजिक से हमारा तात्पर्य किसी देश एवं काल विशेष से संबंधित मानव समाज में अभिव्यक्त परिवर्तनशील जागृति से होता है। इसका उद्भव सामाजिक अन्याय, अनीति, दुराचार, शोषण की प्रक्रिया […]

आधुनिक संपादन कला के वैशिष्ट्य के लिए जिन बिंदुओं की महत्त्वपूर्ण माना जाता है, उस वैज्ञानिक आधार की पृष्ठभूमि शिव पूजन सहाय द्वारा संचालित ‘हिमालय’ में उस समय देखा जा […]


साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। साहित्य एक-दूसरे के दुःख में दुःखी होना और एक-दूसरे के सुख में सुखी होना सिखाता है। वह संपूर्ण मनुष्य का कल्याण हो […]

हिन्दी सिनेमा का आरम्भ पारसी थिएटर की देन है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में महाराष्ट्र और गुजरात में पारसी थिएटर का जन्म माना जाता है। इसके आरंभिक रंगकर्मियों में […]

आदि मानव की विकास परम्परा का आधार मूलभूत आवश्यकता के अतिरिक्त भाषा भी मुख्य आधार रहा है । क्योंकि भाषा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति […]

ईषावास्यमिदं सर्व यत्किंचित जगत्यां जगत। तेन त्यक्तेन भुन्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्।। -इषोपनिशद् मंत्र ईश्वर ने उपहार स्वरूप प्रकृति की समस्त वस्तु उपभोग के लिए संसार के सभी मनुष्यों को प्रदान […]

भारतीय संस्कृति में अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म स्वीकार किया गया । मानवीय सभ्यता के मूल में अहिंसा की भूमिका सबसे अहम है । वैसे तो वैदिक ग्रंथों में अहिंसा […]

साहित्य वह है जिसमें सब कुछ समाहित है। इसे लेकर विद्वानों ने बहुत सारी स्थापनाएँ दी है। जैसे ‘साहित्य समाज का दर्पण है, यह संचित ज्ञान राशि का कोष है’, […]