अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका संपादकीय  डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय शोधार्थी प्रेमचंद की कहानी ‘लांछन’ में अभिव्यक्त जेंडर परफॉर्मेटिविटी और नैतिक पुलिसिंग – जयकृष्णन एम. ‘गोदान उपन्यास ग्राम-जीवन और कृषि-संस्कृति का सशक्त महाकाव्य है’ […]

आधुनिक हिंदी कविताओं में रामकथा के नए आयाम – विजेता लक्ष्मी

शोध-सारांश रामकथा भारतीय साहित्य और संस्कृति की जड़ों में इस प्रकार रची-बसी है कि प्रत्येक युग में उसने नई अर्थ-छवियाँ और नई व्याख्याएँ प्राप्त की हैं। आधुनिक हिंदी कविता में […]

श्रीलाल शुक्ल के साहित्य में काम और प्रेम – डॉ. चन्दन कुमार

‘सूनी घाटी का सूरज’ में रामदास सत्या का सात्विक प्रेम, ‘राग दरबारी’ में बेला-बद्री पहलवान का कामुक प्रेम, ‘सीमाएँ टूटती हैं’ में चाँद-विमल सलूजा का बेमेल और शारीरिक प्रेम, ‘आदमी […]

मधुमालती: लोकजीवन और संस्कृति –  विनय यादव

शोध सार –                    मध्यकाल के निर्गुण कवियों में मंझन का नाम उल्लेखनीय है। मंझन कृत ‘मधुमालती’ सूफी काव्य परंपरा की एक महत्वपूर्ण रचना है। यह काव्य केवल प्रेमकथा तक […]