साहित्य की अनेक विधाऍं होती हैं । उनमें से एक है-‘अलिखा साहित्य’ जो मौखिक रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरण किया हुआ आ रहा है ।उस साहित्य […]
भारतीय ज्ञान परम्परा एवं लोकसाहित्य – जयवीर सिंह, डॉ. प्रवीण तुलशीराम तुपे
शोध-तत्त्व: : भारतीय ज्ञान परम्परा भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परम्पराओं का संगठित स्वरूप है, जिसमें भारत के सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग के प्राचीन, समृद्ध, बहुआयामी बौद्धिकता, सांस्कृतिक ज्ञान […]
ग्रामीण जीवन शैली में कहावतें : लोकानुभव, सांस्कृतिक स्मृति और साहित्यिक प्रयोग – रजनी साहू
सारांश प्रस्तुत शोध पत्र भारतीय ग्रामीण जीवन शैली में कहावतों की भूमिका और महत्त्व को रेखांकित करता है। भारत की मूल संस्कृति उसके गाँवों में निहित है यह किसी लिखित […]
गिरीराज किशोर के उपन्यासों में चित्रित लोक जीवन एवं संस्कृति – अंजु जॉय
लोक साहित्य एक जीवंत सामूहिक चेतना का विश्लेषण है जिसमें किसी समाज की संस्कृति, रीति रिवाज़ें, पहनावे और खान पान का प्रामाणिक दसतावेज होता है। लोक साहित्य का अध्ययन केवल […]
छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति में लोक नृत्य – डॉ. आरती पाठक
छत्तीसगढ़ के समृद्ध आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति में लोक नृत्य एक जीवंत अभिव्यक्ति हैं। “छत्तीसगढ़” के नाम से मशहूर यह हिस्सा, भारत के मध्य में स्थित है और यहां की […]
लोक उत्सव एवं सामाजिक जनचेतना (महाराष्ट्र के विशेष संदर्भ में) – डॉ. दीपक विनायकराव पवार
प्रस्तावना: लोक उत्सव किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामूहिक स्मृति और सामाजिक मूल्यों के प्रतिबिंब होते हैं। ये उत्सव केवल धार्मिक या मौसमी आयोजन नहीं होते, बल्कि इनमें सामाजिक […]
भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक साहित्य – श्यामसुंदर धाकड़
-0- शोध सारांश -0- भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना की दो ऐसी आधारभूत संरचनाएँ हैं जिनके अंतर्संबंध में भारतीय सभ्यता की निरंतरता, समन्वयशीलता और आत्मबोध […]
लोक साहित्य में भारतीय समाज, धर्म और परंपरा – अशोक कुमार
सार भारत एक बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी देश है जिसकी सांस्कृतिक पहचान उसकी लोक परंपराओं और लोक साहित्य में गहराई से निहित है। लोक साहित्य किसी भी समाज के जीवन, उसकी […]
लोक साहित्य में भारतीय संस्कृति – कोमल दगडु तडवी
प्रस्तावना भारतीय संस्कृति विश्वकी प्राचीनतम और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। इसकी जड़ें लोकजीवन में गहराई तक समाई हुई हैं। लोक साहित्य समाज की आत्मा होता है, इस में […]
लोकसाहित्य के अध्ययन की प्रक्रिया एवं दिशाएँ – डॉ. गोम देवी शर्मा
शोध-सार ‘लोकसाहित्य के अध्ययन की प्रक्रिया एवं दिशाएँ’ विषयक यह शोध-लेख लोकसाहित्य की संकल्पना, उसके स्वरूप तथा अध्ययन-पद्धतियों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लोकसाहित्य जनसमुदाय की सामूहिक चेतना, […]





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