तमिलनाडु लोकगीत: भावपक्ष एवं कलापक्ष – डॉ. सुनील पाटिल

साहित्य की अनेक विधाऍं होती हैं । उनमें से एक है-‘अलिखा साहित्य’  जो मौखिक रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरण किया हुआ आ रहा है ।उस साहित्य […]

भारतीय ज्ञान परम्परा एवं लोकसाहित्य – जयवीर सिंह, डॉ. प्रवीण तुलशीराम तुपे

भारत सदियों से सृष्टि एवं आध्यात्मिकता का अनुसंधान केन्द्र रहा है। यहाँ किसी भी कार्य को करने से पहले गुरु को महत्त्व दिया जाता है। भारतीय समाज गुरु एवं प्राकृतिक […]

ग्रामीण जीवन शैली में कहावतें : लोकानुभव, सांस्कृतिक स्मृति और साहित्यिक प्रयोग – रजनी साहू

प्रस्तावना हमारा भारत विविध सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। लोक संस्कृति की आधारशिला ग्रामीण संस्कृति ही है। मुख्य रूप से सामाजिक परंपराएँ, और लोक कला, लोक गीत, लोक कथाएँ, लोक […]

  गिरीराज किशोर के उपन्यासों में चित्रित लोक जीवन एवं संस्कृति – अंजु जॉय

लोक साहित्य एक जीवंत सामूहिक चेतना का विश्लेषण है जिसमें किसी समाज की संस्कृति, रीति रिवाज़ें, पहनावे और खान पान का प्रामाणिक दसतावेज होता है। लोक साहित्य का अध्ययन केवल […]

छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति में लोक नृत्य – डॉ. आरती पाठक

छत्तीसगढ़ के समृद्ध आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति में लोक नृत्य एक जीवंत अभिव्यक्ति हैं।  “छत्तीसगढ़” के नाम से मशहूर यह हिस्सा, भारत के मध्य में स्थित है और यहां की […]

लोक उत्सव एवं सामाजिक जनचेतना (महाराष्ट्र के विशेष संदर्भ में) – डॉ. दीपक विनायकराव पवार

प्रस्तावना: लोक उत्सव किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामूहिक स्मृति और सामाजिक मूल्यों के प्रतिबिंब होते हैं। ये उत्सव केवल धार्मिक या मौसमी आयोजन नहीं होते, बल्कि इनमें सामाजिक […]

भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक साहित्य – श्यामसुंदर धाकड़

भारतीय सभ्यता का इतिहास केवल राजनीतिक या सामाजिक संरचनाओं का इतिहास नहीं है, बल्कि वह विचारों, मूल्यों और अनुभवों की निरंतर परंपरा का इतिहास है। भारतीय ज्ञान परंपरा इस दीर्घ […]

लोक साहित्य में भारतीय समाज, धर्म और परंपरा – अशोक कुमार

लोक साहित्य किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। यह समाज के जीवन, उसकी परंपराओं, आस्थाओं और मूल्यों का सजीव दर्पण होता है। भारत जैसे विशाल, बहुभाषी […]

लोक साहित्य में भारतीय संस्कृति – कोमल दगडु तडवी

प्रस्तावना भारतीय संस्कृति विश्वकी प्राचीनतम और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। इसकी जड़ें लोकजीवन में गहराई तक समाई हुई हैं। लोक साहित्य समाज की आत्मा होता है, इस में […]

लोकसाहित्य के अध्ययन की प्रक्रिया एवं दिशाएँ – डॉ. गोम देवी शर्मा

लोकसाहित्य किसी समाज की सामूहिक चेतना, सांस्कृतिक स्मृति और परंपरागत ज्ञान का जीवंत स्रोत है। यह जनसामान्य के जीवनानुभवों, आस्थाओं और संघर्षों की अभिव्यक्ति है। लोकसाहित्य मौखिक परंपरा के माध्यम […]