सूर के काव्य में कृषक जीवन की अभिव्यक्ति और हिंदी आलोचना – अनिल कुमार

                   “प्रभु  जू , यौँ  किन्ही हम खेती ।                      बंजर    भूमि, गाउ   हर जोते, अरु   जेती की तेती । […]

मानवीय मूल्य, मर्यादा एवं आदर्श के रूप में राम (रामकथा के विशेष संदर्भ में) – युगल किशोर यादव

आज मानव जीवन अनेक विसंगतियों एवं विडम्बनाओं से जूझ रही हैं। एक समय हुआ करता था जब लोग प्रेम, स्नेह, सद्भावना के साथ जीवन यापन किया करते थे। एक दूसरे […]

व्‍याकुल पीढ़ी की नस्‍लें – डॉ. जि‍तेन्‍द्र भगत

अलका सरावगी का अद्यतन उपन्‍यास ‘जानकीदास तेजपाल मैनशन’ (2015) कलकत्‍ता के बड़ाबाजार (सेंट्रल एवेन्‍यू) में स्‍थि‍त 80 परि‍वारोंवाली एक पुरानी जर्जर इमारत का नाम है। वह लगातार झुक रही है, […]

वैश्वीकरण की पृष्ठभूमि और ‘हंस’ की कहानियाँ – डॉ. संजीव कुमार

आजादी के पश्चात भारतीय समाज सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक रूप से सबसे अधिक 90 के दशक में प्रभावित होता है. वैश्वीकरण का यह दौर भारतीय समाज पर गहरा छाप […]

शब्द चित्रों में बोलती पद्मजा – डॉ. नीतू परिहार

आधुनिकता के दौर में सब कुछ जल्दी-जल्दी बदल रहा है। किसी के मुताबिक ढलने का सोचो तब तक तो वह बदल जाता है। समझ नहीं आता बदलाव की ठावं और […]

गांधी विचारधारा का हिंदी कथात्मक साहित्य पर प्रभाव – डॉ.सुनील डहाळे

बीसवीं शताब्दी में भारतीय राजनीति के क्षेत्र में सबसे प्रभावकारी नेता के रूप में मोहनदास करमचंद गांधी का उदय हुआ | भारतभूमि को स्वतंत्रता दिलाकर स्वराज्य स्थापित करने की मनीषा […]

भक्तिकालीन नारी संतों की सामाजिक चेतना – ज्योत्स्ना नारायण

जब संत काव्यधारा की बात चलती है तो हमारे सामने कबीर, रैदास आदि पुरुष संतों की छवि उभरकर आती है। हिन्दी साहित्य के अधिकांश आलोचकों ने संत साहित्य की आलोचना […]

सामाजिक अभिव्यक्ति के बदलते स्वरूप में हिंदी सोशल मीडिया की भूमिका – आशीष कुमार पाण्डेय

वर्तमान परिदृश्य में मीडिया अभिव्यक्ति का अग्रणी माध्यम हो गया है। जिसमें सबसे अधिक चर्चित सोशल मीडिया है। सोशल मीडिया ने बहुत कम समय में अधिक गति धारण की है। […]

इंद्रधनुषी दिगंत: त्रिलोचन – शिवम सिंह

‘‘धरती खुशी मना तू बरसात आ गयी है जो बात कल न थी वह बात आ गयी है।’’ बरसात की पहली बूँद ज्यों धरती में समायी त्यों धरती सोधी खुशबू […]

ओस की बूंद : साम्प्रदायिक राजनीति का यथार्थ – डॉ.कमल कुमार

“उन्होंने हाथ बढ़ा कर वह तस्वीर उतारी और दीवार पर पड़ जाने वाले उस दाग को देखने लगे, जो तस्वीर के कारण दीवार पर पड़ा था और अब तक तस्वीर […]