
हमने संसार जगत में फिल्में तो बहुत देखी है लेकिन ऐसी फिल्म नहीं। जिसकी साहित्य दृष्टि से कहानी भी इतनी उत्कृष्ट और सशक्त हो और वह सबका मन भी हर्षित […]
हमने संसार जगत में फिल्में तो बहुत देखी है लेकिन ऐसी फिल्म नहीं। जिसकी साहित्य दृष्टि से कहानी भी इतनी उत्कृष्ट और सशक्त हो और वह सबका मन भी हर्षित […]
अनुक्रमणिका संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय बातों – बातों में हिंदी पढ़ाते हुए मैं मातृभूमि के प्रति कर्तव्य का निर्वहन कर रही हूँ : हंसादीप (कनाडा की हिंदी कथाकार हंसादीप […]
हिंदी साहित्य में महिलाओं के लेखन की शुरुआत की बात जब भी आती है तो हम सबसे प्रचलित नाम जिसने स्वयं को कृष्ण प्रेम में डुबा दिया, उसका नाम लेते हैं […]
हंसादीप जी कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो में हिंदी अध्यापन से जुडी हैं। आज हिंदी जगत में हंसादीप जी का सृजनात्मक हिंदी लेखन विशेष रूप से पहचान बना रहा है। […]
जीवन के करुणभाव को अभिव्यक्त करने वाली, रचनाओं में संवेदनशीलता को अमूल्यभूत आधार देने वाली कवित्री महादेवी वर्मा के नाम से जाना जाता है |महादेवी वर्मा छायावादी कवित्री के रूप […]
महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवियित्री थीं। रहस्यवादी चिन्तन की प्रधानता के कारण महादेवी का नारी चित्रण अनुभूति प्ररक हो गया है।उन्होंने नारी के मातृत्व,करूणा और आत्मसमर्पण की भावना को […]
महादेवी वर्मा छायावाद की कवयीत्री है । उनके के काव्य में रहस्यवाद दिखाई देता है इसलिए महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहा जाता है । अतः उनके काव्य में आत्मा […]
महादेवी वर्मा छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती है निराला ने हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती की कहां है छायावाद के कवियों ने अपने […]
समय बदला, परिस्थितियाँ बदलीं, विमर्श बदले, किन्तु साधरणीकरण का महत्व कम नहीं हुआ। साधरणीकरण की अवधारणा किसी-न-किसी रूप में अखिल विश्व की साहित्यिक परंपराओं में विद्यमान रही। शब्दों व प्रस्तुतीकरण […]
शिल्प शब्द का अर्थ है निर्माण अथवा बनावट। साहित्य के संदर्भ में किसी रचना के निर्माण अथवा उसकी बनावट में जिस जिस सामग्री का उपयोग होता है उसे शिल्प के […]