अनुक्रमणिका

संपादकीय 

डॉ. आलोक रंजन पांडेय

बातों – बातों में 

समाज को जगाने के लिए टॉर्चबियरर की तरह से होता है साहित्यकार : नीरजा  माधव – डॉ. नूतन पाण्डेय

शोधार्थी

सिलहटी रामायण – अभय रंजन

चंडी चरित्र : हमारी समृद्ध परंपरा का आख्यान- मधुबाला  मधुबाला

प्रेम और सौन्दर्य के कवि : गिरिजाकुमार माथुर – सुदेश कुमार

एक प्रश्नाकुल मनःस्थिति- चेक रचनाकार कारेल चॉपेक का कथा संसार – डॉ. मीनू गेरा

मैथिलीशरण गुप्त कृत ‘साकेत‘ में भारतीय संस्कृति के विविध आयाम – कल्याण कुमार

महात्मा गांधी – बीसवीं सदी का नित्सियन महामानव – प्रशांत कुमार पांडेय

शरद सिंह के उपन्यासों के संदर्भ में नारी-विमर्श – सपना

अनुभूति 

कुमार सोनकरन का दोहार्द्धशतक

गोलेन्द्र पटेल की कविताएँ

आज का सुकरात – सन्तोष खन्ना

जरा हट के

सफर  जासूसी उपन्यासों का – शैलेन्द्र चौहान

 महिला योगदान: पुराणकाल से अब तक – डॉ. होशियार सिंह यादव

समीक्षा

लाेक और दलित जीवन का प्रभावी आख्यान – सूर्यकांत नागर

सिनेमा / फैशन 

स्वातन्त्र्य वीर सावरकर को करीब से देखिए – तेजस पूनियां