संपादकीय

वाद-विवाद के मूल में अपने तर्कों के द्वारा अपने पक्ष को रखने पर बल दिया जाता है। वाल्टर बेजहॉट ने कहा है ”अनुकरण की संस्कृति अधिकतर समाजों में पायीं जाती […]

संपादकीय

अभी पिछ्ले दिनों हमारा समाज अंकित सक्सेना और चंदन गुप्ता की हत्या का गवाह बना । हमने सभ्यताओं के इतिहास में क्रूर से लेकर क्रूरतम समयों को देखा है जहाँ […]

सम्पादकीय

‘… हर चीज मुझे तुम तक ले जाती है मनो हर मौजूद चीज खूशबू, रोशनी, धातुएं स्बकी सब नन्हीं किश्तियाँ हों जे मुझे ले जाती हों तुम तक’ – पाब्लो […]