“गोदान” उपन्यास में अभिव्यक्त स्त्री समस्या – डाॅ. मेरी जमातिया

प्रेमचंद का जन्म बनारस के निकट लमही गांव में हुआ था। बचपन से ही प्रेमचंद को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आठ साल की आयु में ही उनकी मां […]

प्रेमचंदवादी साहित्य का आदित्य प्रेमचंद – डॉ.पंढरीनाथ शिवदास पाटिल

संसार के सार्वभाषिक साहित्य संसार में जो इने – गिने सुप्रसिद्ध महान साहित्यकार हैं | उनमें हिन्दी साहित्य के कलम के जादूगर प्रेमचंद जी का नाम बड़े ही आदर और […]

कृषक के जीवन-संघर्ष की महागाथा: गोदान – डॉ. राधा भारद्वाज

प्रेमचन्द का ‘गोदान’ अवध के एक गरीब किसान का इतिहास है। उन्होंने अपने इस उपन्यास में इस प्रकार के मानव चरित्र के चित्र उपस्थित किए हैं जिनसे साहित्य इतिहास न […]

गोदान उपन्यास में चित्रित भारतीय कृषक समाज – राखी

प्रेमचंद की कोई भी कृति पढ़ने के बाद सबसे सहज प्रश्न तो यही उठता है कि कब लिखी गई थी। अधिकतर आलोचकों ने इसी प्रश्न को पूछा है। वे इस […]

प्रेमचंद के उपन्यासों में स्त्री विमर्श : एक अध्ययन – सीमा सिंह

प्रस्तावना– प्रेमचंद और उनका साहित्य हमारी संस्कृति की धरोहर है। प्रेमचंद ने अपने लेखनी में बड़ी ही सूक्ष्म दृष्टि नारी की व्यथा पर केंद्रित की है। इस आलेख में प्रेमचंद […]

फणीश्वरनाथ रेणु के रिपोर्ताज में अंचल का यर्थाथ रूप – प्रियंका कुमारी

समकालीन हिंदी कथा साहित्य में जहाँ एक और फणीश्वर नाथ रेणु  कथाकार के रूप में स्थापित हैं| वहीं उनके द्वारा लिखे गए संस्मरण और रिपोर्ताज का भी महत्वपूर्ण स्थान है। […]

दुर्लभ जीवन्तता की त्रासदी (पहलवान की ढोलक) – राम विनय शर्मा

फणीश्वरनाथ रेणु की एक उल्लेखनीय कहानी है ‘पहलवान की ढोलक’। इसमें लेखक ने ढोलक को एक वाद्य यन्त्र के रूप में नहीं, जीवन्तता का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया है। एक […]

फणीश्वर नाथ रेणु की साहित्य साधना – निधी झा

फणीश्वर नाथ रेणु हिन्दी साहित्य के  उन  महान कथाकारों में से एक हैं, जिनका साहित्य उनके समय तो प्रासंगिक था ही परंतु समय के साथ- साथ उनके साहित्य की महत्वता […]

राकेश धर द्विवेदी की कविताएं

1. सुनो नकाबपोश चारों तरफ दिख रहे हैं दुनिया में नकाब लगाए लोग आपसे मिलने, बतियाने से हाथ मिलाने से घबराते हुए जल्दी से किनारे से निकलकर मुँह छिपा कर […]

महावीर सिंह रावत की कविताएं

1. घर जलता रहा और वे ज़िद पर अड़े रहे, संभाल ना सके चार मित्र भी, और वे अनजान भीड़ में पड़े रहे, बड़ा गुमान था हमें इस बात का […]