
“उन्होंने हाथ बढ़ा कर वह तस्वीर उतारी और दीवार पर पड़ जाने वाले उस दाग को देखने लगे, जो तस्वीर के कारण दीवार पर पड़ा था और अब तक तस्वीर […]

“उन्होंने हाथ बढ़ा कर वह तस्वीर उतारी और दीवार पर पड़ जाने वाले उस दाग को देखने लगे, जो तस्वीर के कारण दीवार पर पड़ा था और अब तक तस्वीर […]

हिंदी भक्ति काव्य में ‘गिरधर गोपाल’ से अनन्य प्रेम करने वाली मीरा का स्थान महत्वपूर्ण है। वह भारत के कृष्ण भक्तों में एक प्रमुख स्त्री भक्त है। मीरा के सम्पूर्ण […]

कहानी पढ़ना हमेशा ही सुखद रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उसका छोटा होना है। कभी भी कहीं भी हम कुछ समय निकालकर कहानी पढ़ लेते हैं । कहानी पढ़ने […]

प्रत्येक मानवतावादी व्यक्ति सकारात्मक शक्ति के संपर्क में शीघ्र ही आ जाता है। जिसकी अमर झलक उसके संपूर्ण व्यक्तित्व और कृतित्व में स्पष्ट दिखती है। ऐसे ही मानवीय मूल्यों एवं […]

२१वीं सदी के कई महत्वपूर्ण विमर्शों में एक विमर्श पर्यावरण भी है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता चला जा रहा है जिससे खाद्यान की पैदावार में […]

भारत में 1990 के बाद भूमंडलीकरण, उदारीकरण तथा निजीकरण जैसी नई संकल्पनाओं का जन्म हुआ. भूमंडलीकरण की प्रकिया के चलते अर्थकेंद्री समाज में उपभोक्तावाद तथा बाजारवाद का प्रचलन बढ़ा. ‘भारत […]

नारी आदिम संस्कृति का उद्गम स्थल है, नारी पुरुष की प्रेरणा है और पुरुष संघर्ष का प्रतीक है। ‘‘दोनों की भिन्न प्रकृति से ही परस्पर पूरकता और जीवन की पूर्णता संभव है।’’ याज्ञवल्क्य […]

‘छायावाद का काल गाँधी जी के नेतृत्व एवं राष्ट्र‘-भावना के प्रसार का काल था’ | उनसे प्रेरित होकर पुरूषों के साथ-साथ स्त्रियों ने भी देश के लिए बढ़-चढ़कर कदम उठाया। ‘असहयोग आंदोलन […]

हिंदी साहित्य के इतिहास में ‘छायावाद’ का समय 1918 से 1936 तक माना जाता है । छायावादी काव्य-भाषा और पल्लव को समझने से पूर्व दरअसल छायावाद को समझना होगा । […]

सहानुभूति, कल्पना ,अध्यात्मिक छाया, लाक्षणिक विचित्रता, मूर्तिमत्ता, प्रकृति का मानवीकरण आदि सभी विशेषताएं किसी एक ही युग में प्रचुरता के साथ मिलती हैं तो वह है छायावाद। हिंदी साहित्य में […]