
कमलेश्वर ने ‘ कितने पाकिस्तान ‘ के विराट कथ्य में जहाँ एक ओर पौराणिक या पुराकथाओं का प्रयोग कर साहित्य और लोक प्रचलित इतिहास में मिथकों की परम्परा और प्रयोग […]

कमलेश्वर ने ‘ कितने पाकिस्तान ‘ के विराट कथ्य में जहाँ एक ओर पौराणिक या पुराकथाओं का प्रयोग कर साहित्य और लोक प्रचलित इतिहास में मिथकों की परम्परा और प्रयोग […]

भारतीय चिंतन में विवाह को एक पवित्र एवं पुण्य संस्कार के रूप में स्वीकार किया गया है। यह मानव को दायित्ववान और परिपक्व बनाने के लिए आवश्यक है। सरल शब्दों […]

शोध सारांश मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘लांछन’ एक महिला आश्रम की पृष्ठभूमि में रची गई एक ऐसी कहानी है, जो जेंडर भूमिकाओं, सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत शक्ति की जटिलताओं को […]

‘गोदान’ मुंशी प्रेमचंद का अंतिम पूर्ण उपन्यास है, जिसमें ग्राम जीवन और कृषि संस्कृति का चित्रण किया गया है। ‘होरी’ कृषक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। होरी का जीवन आर्थिक […]

हिंदी साहित्य अनेक विधाओं से समृद्ध साहित्य माना जाता है। विशेष रूप से हिंदी कथा साहित्य की चर्चा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्वभर में जिनके कारण होती है […]
शोध-सारांश रामकथा भारतीय साहित्य और संस्कृति की जड़ों में इस प्रकार रची-बसी है कि प्रत्येक युग में उसने नई अर्थ-छवियाँ और नई व्याख्याएँ प्राप्त की हैं। आधुनिक हिंदी कविता में […]

शोध सार: मुंशी प्रेमचंद का गोदान हिंदी साहित्य की कालजयी कृति मानी जाती है| यह एक सामाजिक दर्पण है, जो औपनिवेशिक भारत के किसानों के शोषण, वर्ग संघर्ष और परंपरागत […]

हिंदी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद ऐसे अद्वितीय साहित्यकार हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए किसी विशेष विषय या पृष्ठभूमि की आवश्यकता नहीं होती। वे जनमानस के लेखक हैं, जिनकी रचनाओं में […]

प्रेमचंद के विपुल साहित्य में से किसी एक बिंदु पर बात करना समुद्र-मंथन जैसी ही क्रिया है। उसमें से एक बूँद भी निकाल लेना बहुत महत्त्व की बात है। प्रेमचंद […]

प्रेमचंद जनवादी चेतना तथा मानवतावादी दृष्टि के प्रतिनिधि साहित्यकार हैं। हिंदी कथा-साहित्य में मुंशी प्रेमचंद कथा सम्राट नाम से अभिहित है। हिंदी कथा-साहित्य अर्थात साहित्य की कहानी और उपन्यास इन […]