समझ (लघुकथा) – डॉ. सौरभ कुमार झा

एक बार एक युवक अपनी असफलताओं से बहुत परेशान था। उसे लगता था कि दुनिया के सभी लोग उससे बेहतर हैं। वह हर दिन दूसरों की सफलता देखकर दुखी हो […]

डॉ.गोविंद गुंडप्पा शिवशेट्टे की कविताएं

 हां यही बुजुर्ग पेड़ हैं गांव का… हां यही बुजुर्ग पेड़ हैं गांव का… इमली का…सबका पसंदीदा नाम सुनते ही जिव्हा लपलपाती है ना! आपकी ही नहीं,हमारे दादा-दादी, दादा-परदादी की […]

ऑपरेशन सिंदूर – डॉ. पवन कुमार

पहलगाँव की धरती रोई, छल से किया जो वार। निर्दोषों के खून से लथपथ, यह अपना घर द्वार। नही मौन अब भारत बैठा, टूट पड़ा बन सिंह प्रचंड जैसा जिसने […]