घनानंद के काव्य में व्यंजित ‘प्रेम’ का आदर्श स्वरूप – रवि कृष्ण कटियार

यह मनुष्य की सीमा भी है और प्रकृति की महानता भी कि उसने सदैव ही मानव निर्मिति को आइना दिखाया है, जब हम किसी भाव को शब्दों में बयाँ नहीं […]

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संपादकीय दीपक जायसवाल बातों बातों में हिंदी साहित्य के विद्वान और अनुवादविद डॉ. पूरनचंद टंडन से सहचर टीम की खास बात-चीत शोधार्थी भोजपुरी कहावतों में नारी- अर्चना उपाध्याय कबीर की […]

सम्पादकीय

‘… हर चीज मुझे तुम तक ले जाती है मनो हर मौजूद चीज खूशबू, रोशनी, धातुएं स्बकी सब नन्हीं किश्तियाँ हों जे मुझे ले जाती हों तुम तक’ – पाब्लो […]

भोजपुरी कहावतों में नारी – अर्चना उपाध्याय

कहावतें मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन के अनुभव तथा ज्ञान का समुच्चय होती हैं। मानव अनादिकाल से जो कुछ भी देखता-सुनता तथा अनुभव करता रहा है, उसे ही उसने सूत्रबद्ध शैली […]