
‘टीवी में दृश्य नहीं बोलते’- यह पढ़कर आपको अटपटा लग रहा होगा, आपको कुछ अजीब लग रहा होगा क्योंकि टीवी यानी टेलीविजन तो दृश्य माध्यम ही है जिसमें चलती-फिरती-घूमती तस्वीरें […]

‘टीवी में दृश्य नहीं बोलते’- यह पढ़कर आपको अटपटा लग रहा होगा, आपको कुछ अजीब लग रहा होगा क्योंकि टीवी यानी टेलीविजन तो दृश्य माध्यम ही है जिसमें चलती-फिरती-घूमती तस्वीरें […]

भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास में इलाहाबाद का स्थान कुछ गिने-चुने नामों में आता है|प्राचीन धार्मिक इतिहास में इसे देवराज प्रयाग कहा जाता रहा है|गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती का […]

उत्तराखंड के पहाड़ों के बीच एक जगह थी रामगढ़ …रामगढ़ माने तल्हा से मलहा तक की दुनिया …ऊंचाई से निचाई का संयोग…जीवन से बर्फ़ का मिलन और बर्फ़ से गर्माहट […]

कथा जनवरी महीने के पूर्वार्ध की है। दिनचर्या के अनुसार सबेरे पास के रेलवे स्टेशन के ओर दौड़ने गयी थी। नित्य की भाँति सबकुछ सामान्य था । रेलवे – स्टेशन […]

मीडिया समाज का आईना होता है। यही नहीं यह लोकतंत्र के चार स्तम्भ में से एक सशक्त स्तम्भ माना जाता है। स्वतंत्रता के बाद सामाजिक ,राजनीतिक और आर्थिक ढाँचे में […]

एक शाम मैं अपने एक मित्र से एक खास मुद्दे पर मशविरा करने को अपने घर से निकला। जिससे मिलने को मैं काफी दिनों से सोच रहा था। लेकिन व्यस्तता के चलते […]

पुरुष वर्चस्ववादी समाज में आज भी महिलाओं की दुनिया घर की चारदीवारी के भीतर सिमट कर रह जाती है।ऐसे वातावरण में महिला फिल्मकारों द्वारा उस चारदीवारी को तोड़कर पितृसत्तात्मक समाज […]

भीष्म जी के अन्दर अभिनय के प्रति अभिव्यक्ति की भावना स्कूल के दिनों में जागृत हुई थी, जब भीष्म चैथी कक्षा में थे, तब उन्होंने स्कूल में खेले गये नाटक […]

संपादकीय- डॉ. आलोक रंजन पांडेय शोधार्थी आधी आबादी की आवाज़: इदन्नमम – डॉ. तेज नारायण ओझा / रजनी पाण्डेय / रश्मि पाण्डेय कवि द्विजदेव – डाॅ. ममता सिंगला साहित्यकार दूधनाथ […]

सार : स्त्री जीवन के अनेक पहलू हैं जो उम्र, स्थान, प्रस्थिति के अनुरूप नये नये ढंग से परिचालित होती नजर आती हैं। इसे उभारने का काम जब से लेखिकाओं ने किया […]