
गौरेया इंसानों के साथ रहने वाला पक्षी वर्तमान में विलुप्ति की कगार पर जा पहुँचा है। ये छोटे-छोटे कीड़ों को खाकर प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में सहायक है। गोरैया […]

गौरेया इंसानों के साथ रहने वाला पक्षी वर्तमान में विलुप्ति की कगार पर जा पहुँचा है। ये छोटे-छोटे कीड़ों को खाकर प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में सहायक है। गोरैया […]

समय की मांग कहो या संस्कृति का स्वाभिमान वह अब लौट रहा है। भारत अब लौट रहा है । वह स्वयभू होने को है। हाँ, हाँ! वह स्वयंभू पहले से […]

मैं अतीत को जीत,जीत की पहली एक किरण हूँ, भारत के आते भविष्य का मैं मंगलाचरण हूँ। बदल रहा यह देश, विश्व को मैंने दिखा दिया है, मैं भिलाई […]

यह एक ऐतिहासिक फ़िल्म है। जो अच्छी तरह से किक मारती है, बीच में फड़फड़ाती है और फिर चरमोत्कर्ष में कुछ अच्छे घूंसे मारती है। पीरियड ड्रामा या ऐतिहासिक थकान […]


संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय बातों – बातों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. साधना शर्मा जी से सहचर टीम की आत्मीय बातचीत शोधार्थी लोक-गीतों में नारीस्वर – […]

आप सभी सुधी पाठकों का जो अथाह स्नेह हमारी इस पत्रिका को मिल रहा है, यह इसी का परिणाम है कि हम इस यात्रा में अब काफ़ी आगे आ पहुँचे […]

प्रश्न 1. हिंदी भाषा के वैश्विक परिदृश्य पर आपके क्या विचार हैं ? उत्तर – हिंदी भाषा का जो वैश्विक परिदृश्य है, वैसे तो भारत में जो अपनी हिंदी की […]

लोकगीत लोक साहित्य की सशक्त और प्रधान विधा है। लोकगीत सरल, मधुर होते हैं जिनमें सुर, लय, तान और गेयता का स्वाभाविक प्रवाह होता है। लोक गीत सामूहिक जन चेतना […]

कृष्ण की भक्ति में लीन मीरा के साहित्य में स्त्री और काव्य का अनोखा संबंध है क्योंकि काव्य के लिए स्त्री प्राणस्वरूपा होती है। काव्य संवेदना और अनुभूति का विषय […]