
भारतीय इतिहास का मध्यकाल कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है। यह वही दौर है जब भारत की धरती पर मुसलमानों का विधिवत् शासन स्थापित हुआ था। इसी दौर में भक्ति ने […]

भारतीय इतिहास का मध्यकाल कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है। यह वही दौर है जब भारत की धरती पर मुसलमानों का विधिवत् शासन स्थापित हुआ था। इसी दौर में भक्ति ने […]

मनुष्य अपने व्यापक अर्थ में स्त्री-पुरुष का योग है। सभ्यता और समाज के विकास में इन दोनों का ही सहयोग समान रूप से आवश्यक माना गया है। लेकिन भारतीय समाज […]

फिल्म और साहित्य दोनों ही मानवीय सम्वेदनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। पुस्तकों में स्त्रियों की दशा-दुर्दशा को हम शताब्दियों से पढ़ते-सुनते आए हैं। फिल्मी परदे के चकाचौंध […]

बाल गीत – माँ तुम बताओ ना कोयल अब कूं-कूं नहीं करती, गौरेया अब फुदकती नहीं दिखती। न ही सुनाई देती है मैना की, मनमोहक बातें। बुलबुल के चुलबुलेपन की, […]

आज प्रकृति चीख-चीखकर करा रही, हमको एहसास, क्या मिला छेड़कर मुझको तुमको, जो भोग रहे हो ये परिणाम। पहले ज़हर हवा में घोला, सांसे अपनी रोक ली, और जल को […]

हम फिरोज़शाह कोटला के क़िले पर ऑटो से उतरे ही थे कि अविशा ने सवाल पूछ दिया ‘मम्मा ये सारे क़िले एक जैसे ही क्यों होते हैं ?इतने टूटे, एक […]

चिंता की लकीरें हर तरफ़ छाया हुआ है घुप अंधेरा, खौफ़नाक मंजर ने बनाया घनेरा। माथे पे मेरे खिंची चिंता की लकीरें, तम से ढका दिनमान हो न सवेरा।। राह […]

क्या फ़र्क पड़ता है, दिल पर ज़ख्म एक हो या हज़ार। उठती हैं टीसें सहती हूँ अत्याचार, बेढब स्वेच्छाचार की राजनीति पर तुम पलते हो जैसे सदाबहार क्या फ़र्क पड़ता […]

चलो एक नई शुरुआत करते हैं। थोड़ी बहुत ख़ुद से ख़ुद की बात करते हैं।। देखते है क्या बह रहा है ख़ुद के अंदर। बहती हुई नदियों से मिलता समंदर। […]

दरवाजे पर आहट हुई मैंने एक अधखुले दरवाजे को खोलते हुए देखा दरवाजे पर केसरी रंग की साड़ी में लिपटी एक युवती जिसके ललाट पर सिंदुर था कुछ युवकों और […]