
संतों की हमेशा से दूर दृष्टि ही रही है जो हमें आज भी प्रासंगिक लगती है। उन्हें समाज निर्मित करना था इसलिए वे उसमें नयी दृष्टि भरना चाहते थे, इसलिए […]

संतों की हमेशा से दूर दृष्टि ही रही है जो हमें आज भी प्रासंगिक लगती है। उन्हें समाज निर्मित करना था इसलिए वे उसमें नयी दृष्टि भरना चाहते थे, इसलिए […]

हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में कबीर इकलौते ऐसे कवि हैं , जिन्होंने अपना समस्त जीवन लोक-कल्याण हेतु समर्पित किया था । वे आजीवन समाज में व्याप्त आडम्बरों पर अपनी तीव्र […]

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक आदमी के पास दूसरे के लिए वक्त नहीं है। रिश्ते ही आपस में एक दूसरे के लिए स्थान ढूंढ रहे हैं उस समय […]

किस बला का नाम है कबीर! कभी पंडितों की आलोचना कर रहा है तो कभी मुल्लाओं की.किसी को नहीं छोड़ा.यहां तक कि कमाल को भी. कमाल..अपने बेटे को भी.. जिस […]

कबीरदास हिंदी साहित्य के मध्यकाल में उत्पन्न ऐसे व्यक्ति हैं , जो एक ही साथ संत हैं , फ़क़ीर हैं ,गृहस्थ हैं,समाज सुधारक हैं और एक उच्च कोटि के कवि […]

कबीर जो सदैव आलोचकों के केंद्र में रहे हैं | जहाँ साहित्यिक जगत में न जाने क्यों कबीर की रचनाओं को लेकर खींचतान की जा रही है | कबीर को […]

कबीर क्रान्ति के अग्रदूत हैं जिन्होंने कुव्यवस्था में भूचाल ला दिया और एक नए युग का सूत्रपात किया। कबीर ने अंधविश्वास पाखण्ड और आडंबर को जड़ से हिलाते हुए समाज […]

कबीर ने अनुभव की पाठशाला में जीवन की शिक्षा ली थी। उस समय का समाज मानवता की कब्र पर पल्लवित और पोषित हो रहा है । सामंतवाद का बोलबाला था, […]

मध्ययुग के सामाजिक, धार्मिक व राजनैतिक परिदृश्य पर हम यदि नजर डाले तो पाते हैं कि इन तीनों ही क्षेत्रों में तत्कालीन परिस्थितियँा मूल्यों के लिए तरस रही थी। जन-सामान्य […]

कबीर मध्यकाल के निर्गुण विचारधारा के कवि हैं । आधुनिक काल में कबीर का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता हैं धार्मिक कल के कबीर अकेले कवि हैं ,जिन्होंने […]