
प्रेमचंद के विपुल साहित्य में से किसी एक बिंदु पर बात करना समुद्र-मंथन जैसी ही क्रिया है। उसमें से एक बूँद भी निकाल लेना बहुत महत्त्व की बात है। प्रेमचंद […]

प्रेमचंद के विपुल साहित्य में से किसी एक बिंदु पर बात करना समुद्र-मंथन जैसी ही क्रिया है। उसमें से एक बूँद भी निकाल लेना बहुत महत्त्व की बात है। प्रेमचंद […]

प्रेमचंद जनवादी चेतना तथा मानवतावादी दृष्टि के प्रतिनिधि साहित्यकार हैं। हिंदी कथा-साहित्य में मुंशी प्रेमचंद कथा सम्राट नाम से अभिहित है। हिंदी कथा-साहित्य अर्थात साहित्य की कहानी और उपन्यास इन […]
मुंशी प्रेमचंद साहित्य जगत का ऐसा नाम है जिनकी रचनाएं समाज का दर्पण है। प्रेमचंद लेखक और मनुष्य दोनों ही रूपों में महान हैं। प्रेमचंद हिन्दी के पहले उपन्यासकार नहीं […]

“जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं, उन्हें बार-बार सींचने की जरूरत नहीं होती।” कर्मभूमि हिन्दी साहित्य जगत का अरूणिम आकाश बगैर धनपतराय श्रीवास्तव की सुनहरी आभा के […]

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से 20वीं शताब्दी के मध्य तक भारत में एक व्यापक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई, जिसने शिक्षा, जाति-उन्मूलन, स्त्री-स्वतंत्रता और धार्मिक सुधार जैसे […]

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों में मानवीय मूल्य, मानवीय संवेदना के साथ सामाजिक यथार्थ का मार्मिक चित्रण किया है। उन्होंने उपन्यासों के पात्रों के माध्यम से समाज में […]

शोध सार : भारतीय समाज और संस्कृति में बुजुर्गों को सदा ही सम्मान का स्थान दिया जाता था। परन्तु आज आधुनिकीकरण के प्रभाव से परिवार में वृद्ध की अहमियत कम […]

प्रेमचंद एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है जिनकी सृजनात्मक प्रतिभा से उनका नाम विश्व के गिने- चुने कथाकारों में लिया जाता है। आलोचक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के कथन के अनुसार […]

शोध सारांश – मुंशी प्रेमचंद को कौन नहीं जानता है । उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चार मील दूर लमही गाँव में जन्मे मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय […]

कफन प्रेमचन्द की ही नहीं समूचे हिन्दी साहित्य की सर्वाधिक चर्चित कहानी है । मुंशी जी जीवन तथा साहित्य के सूक्ष्मदर्शी तथा दूरदर्शी साहित्यकार थे । उनकी रचनाओं में वर्तमान […]