वैश्वीकरण के दौर में भाषा के विभिन्न आयाम – डॉ. कमलिनी पाणिग्राही

वैश्वीकरण और आर्थिक उदारीकरण के इस युग में जहां हर तरफ विभिन्न कंपनियों में गलाकाट प्रतियोगिता चल रही है, उसमें विज्ञापन एक ऐसा हथियार बनकर सामने आया है जिसकी जितनी […]

अंधकार में प्रभापुंज : स्वामी विवेकानंद – सन्तोष खन्ना

स्वामी विवेकानंद भारतीय आध्यात्मिक और धार्मिक मनीषा के सिरमौर व्यक्तित्व थे। 40 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने देश और विश्व को अपने अवदान से इतना अनुप्राणित और समृद्ध कर […]

बेहद्दी : एक लोकगीत – डाॅ. मंजु तॅवर

इससे पूर्व प्रकाशित भारतीय लोक और स्त्रीमन की 5 श्रृंखलाओं में भोजपुरी के लोकगीत, खड़ी बोली के लोकगीत, राजस्थानी लोकगीत, हरियाणी लोकगीत व पंजाबी लोकगीत की बेहद्दी में मैंने जहां […]

असफल होते सरकारी विद्यालयों की कहानी : एक जुबानी – डॉ. अमितेश कुमार शर्मा 

सरकार ने समाज में दो तरह के विद्यालयों की व्यवस्था कर रखी है। सरकारी प्राथमिक विद्यालय अत्यन्त गरीब बच्चों के विद्यालय है, जहाँ सब कुछ निःशुल्क प्राप्त होता है। वहीं […]

अष्टभुजा शुक्ल के काव्य में चित्रित ग्रामीण जीवन – प्रियंका झा

भारत गाँवों का देश है,यहाँ 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग गाँवों में रहते है,और 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का जीवन कृषि पर निर्भर है,लेकिन फिर भी क्यों गाँव और […]

भाषा और अस्मिता का अंतस्संबंध – बीरेन्द्र सिंह

अस्मिता का अर्थ है- पहचान तथा भाषाई अस्मिता से तात्पर्य है- भाषा बोलने वालों की अपनी पहचान। ‘अस्मिता’ शब्द के संदर्भ में डॉ. नामवर सिंह ने कहा है कि- “हिंदी […]

हिंदी का लोक व्यवहार – डॉ. ममता सिंगला

आदि मानव की विकास परम्परा का आधार मूलभूत आवश्यकता के अतिरिक्त भाषा भी मुख्य आधार रहा है । क्योंकि भाषा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति […]

आधुनिक कविताओ में विचारों का संप्रेषण :मिथक – डॉ .मोनिका देवी

आधुनिक कविता में जटिल विचारों के संप्रेषण के लिए मिथक का व्यापक प्रयोग किया गया l आचार्य हजारी प्रसाद दिव्वेदी ने अग्रेज़ी के( myth )शब्द के समानार्थी के रूप में […]

जटिल जीवन नद में तिर तिर – सच्चिदानंद पाण्डेय

वर्तमान समय मनुष्यता की तलाश का है|इस समय यदि किसी में सर्वाधिक क्षरण दृष्टिगत होता है,तो वह मनुष्यता है|आज के इस संकटग्रस्त समय में दुनिया अनेक ध्रुवों में विभाजित होती […]

हिंदी की दशा की पड़ताल  – जयन्त जिज्ञासु

अपनी चेतना को अभिव्यक्त करने व अपने विचारों से दूसरों को अवगत कराने तथा दूसरे की राय व भावनाओं को जानने का माध्यम है भाषा। संप्रेषण व विचार-विनिमय का सशक्त […]