
साहित्य मानवीय सृष्टि है, अतः वह सोद्देश्य और मनुष्यता के प्रति उत्तरदायी होती है। जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि उनकी अभिरूचि इतिहास के […]

साहित्य मानवीय सृष्टि है, अतः वह सोद्देश्य और मनुष्यता के प्रति उत्तरदायी होती है। जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि उनकी अभिरूचि इतिहास के […]

डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर एक क्रन्तिकारी चेतना के युग पुरुष थे| उनकी दूर दृष्टि ने बहुत पहले ही स्त्री शक्ति को पहचान लिया था| उनको इस बात का ज्ञान था […]

साहित्य के महारथी स्वर्गीय श्री रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवन राजनीति, साहित्य,और व्यक्तित्व का ऐसा अनुपम समावेश है जो शायद ही और कहीं मिलेगा । 68 साल का बेनीपुरी का जीवन […]

प्रसिद्ध समाजशास्त्री एवं राजनीतिज्ञ प्रो. आनंद कुमार द्धारा पिछले 25 वर्षो में लिखे गए लेखों तथा दिए गए भाषणों को एकत्रित कर डॉ. प्रदीप कुमार सिंह और डॉ. रामप्रकाश द्धिवेदी […]

पिछली सदी शुरू होने से पूर्व ही जब देश अपनी स्वतन्त्रता पाने की ओर अग्रसर था और देश में राजनैतिक और सामाजिक सुधार का व्यापक दौर चल रहा था, उसी […]

लोकाचार या लोकजीवन भारत जैसे ग्राम्य आधारित समाज का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसकी पैठ समाज की अन्तर्षिराओं में रक्त की भाँति है। इस दृष्टि से हिन्दी सिनेमा के […]


संपादकीय- डॉ. आलोक रंजन पांडेय बातों-बातों में प्रो. गजेंद्र पाठक से सहचर टीम की आत्मीय बातचीत शोधार्थी हिन्दी कथा साहित्य : बाजारवाद और उपभोक्तावाद – डॉ. कमलिनी पाणिग्राही तुलसी की […]

वाद-विवाद के मूल में अपने तर्कों के द्वारा अपने पक्ष को रखने पर बल दिया जाता है। वाल्टर बेजहॉट ने कहा है ”अनुकरण की संस्कृति अधिकतर समाजों में पायीं जाती […]

सहचर टीम – नमस्कार,आपके पास बक्सर,दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज और जे.एन. यू. और हैदराबाद के अनुभव हैं,आपने इन चार अलग – अलग जगहों को जिया है। बक्सर ठेठ भोजपुरी का […]