अंतस से संवाद करें।
पीड़ा का अनुवाद करें।
थोड़ा समय निकालें हम
मीत पुराने याद करें।
त्यागें अब रोना – धोना
गीतों का अनुनाद करें।
प्रकृति हमें समझाती है
तनिक प्रकट आह्लाद करें।
एक कदम पीछे हट लें
आपस में न विवाद करें।
साथ नहीं कुछ ले जाना
किसके लिए प्रमाद करें।
पिंजड़े में उड़ना भूला
पक्षी को आजाद करें।

गौरीशंकर वैश्य विनम्र

लखनऊ

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