राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

गौरैया के हक़ में  गांव के चैपाल में चहकती गौरैया मीठे-मीठे गीत सुनाती गौरैया गुड़िया को धीरे से रिझाती गौरैया याद आज आती है हरे-भरे पेड़ों पर फुदकती गौरैया घर […]

सृष्टि भार्गव की कविताएँ

फ़रिश्ता चाँद का  हज़ारों गम हैं बिछुड़न के एक नगीना प्रेम का रात उजयाली करने आया एक फ़रिश्ता चाँद का स्वप्न सुंदर नयन मग्न और दरिया जो शाम का वक़्त […]

डॉ. अवधेश कुमार ‘अवध’ की कविताएँ

1. घातक जाल बिछाये हैं घर – बाहर या प्लॉंट सड़क, हर जगह मौत के साये हैं। हमने ही तो आँख मूँदकर, घातक जाल बिछाये हैं।। साफ सफाई रखकर के, […]

कड़वा सच (कविता) – नीरज त्यागी

दर्द  कुछ  इस  तरह किसी भी जीवन में घर कर जाता है। आँखो के आँशुओ को आँखो के घर से बेघर कर जाता है।। अँधेरे भी जीवन मे कुछ ऐसे […]

नीरज त्यागी की कविताएं

1. है कैक्टस सा व्यक्तित्व मेरा अनभिज्ञ नहीं मैं,अज्ञात नहीं मैं, जीवन की अब हर कठिनाई से, अनजान बना रहता  हूँ  मैं, अब मौत की भी सच्चाई से। ज्ञान मेरे मन […]

तमाशा मज़ेदार न था (कविता) – सलिल सरोज

वो खरीद लेता था सबके आँसू बेधड़क वो इस ज़माने के लिए अभी समझदार न था कुछ तो कमी थी जो तू किसी की न हो सकी तेरा हुश्न कातिल […]

ज्योति की कविताएं

रामबाण नुस्खा एहसास तुम्हारे जब घुटने लगे आँखे जब तुम्हारी छलकने को हो कैद कर दो खुद को भीड़ में कहीं … शब्द जब तुम्हारे खामोश होने लगें निगाहें तुम्हारी […]

विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’ की कविताएं

आभा चली गई… (स्मरण अटल जी का) बहुत दिनों से जूझ रही थी  वो जालिम आखिर सफल हो ही गई अपने मकसद में               […]

पहचान (लघुकथा)- डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

वह पता नहीं कौन था! उस छोटे से सर्कस में, चाहे जानवर हो या इंसान, वह सबसे बात करने में समर्थ था। प्रत्येक के लिए वह एक ही प्रश्न लाया […]

एक महिला मजदूर – दीपक धर्मा

यदि कहीं कोई महिला मजदूरी कर रही होती है तो उसे इस तरह का कठोर परिश्रम करते देखकर जहन में अनगिनत सवाल उठते है। अरे….! ये एक महिला है। अपने सिर […]