राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

एक साहित्यिक गोष्ठी का सारांश शहर के तमाम बुद्धिजीवियों कथाकारों और कवियों ने हिन्दुस्तान की समस्याओं को लेकर संगोष्ठी की मंच पर हिन्दुस्तान का नक्शा लगा हुआ था किसी ने […]

डॉ. दिग्विजय कुमार शर्मा “द्रोण” की कविता

अबकी बार इस बार मुझे लगा कि कैसे चीजें बार बार ज्यादा याद आती हैं और टूट टूट कर बुरी तरह से दिल को आहत पहुंचाती हैं। बाहर निकलकर जिधर […]

पुराना किला और चोर (कहानी) – संदीप शर्मा

दोनों ने पुराने किले के खंडहर की ओर कदम मोड़ लिए। भागते हुए एक चोर बोला,‘‘मैं कहता हूं एक बार सोच लो, क्या उसी ओर दौड़ना है। वहां तो पहले […]

स्कूटी की सवारी (बाल कविता) – नीरज त्यागी

नई स्कूटी लेकर आया राजू भालू, उसका दोस्त चिम्पू बंदर है बहुत चालू। मीठी बातों से राजू को बहकाता, रोज उसकी स्कूटी मजे से चलाता।। एक दिन चिम्पू का चौराहे […]

सुनील कुमार शर्मा की कविताएँ

प्रिय तुम हो कहाँ गगन कहाँ धरा पर ही वो मनोहर सौंदर्य खोजता हूँ । चुभन कहाँ मधुकलश लिये भावों का मैं घूमता हूँ । सखा तुम हो कहाँ ? […]

राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

हारना वैसे तो हारना एक दुःखदायी क्रिया है लेकिन कभी-कभी यह सुखदायी भी हो जाता है। जैसे हम हार जाते हैं किसी छोटे से बच्चे से खेल में और खुश […]

मनोज कुमार की कविता

पूछा…… क्‍यों……. नहीं ? अम्‍मा………..अम्‍मा………अम्‍मा जाऊँ ? अम्‍मा……….मॉं………….. माई जाऊँ ? देख मैं अकेला तेरे खाने का कर रही हूँ तैयारी ठंडी होने से पहले बिन बुलावे से आना मेरा […]

आदमी ( कविता) – मनोज शर्मा

रोज़ आदमी आदमी नहीं होता कभी कभी आदमी में एक अलग किस्म का आदमी होता है जो बिल्कुल भिन्न अवसरवादी सा होता है जो अलग बिल्कुल सपाट नया चेहरा लिए […]

बिनोद कुमार रजक की कविताएँ

खेल सांत्वना का मृतक परिवार से मिलते हो ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं उनके जीवन में सांत्वना के पुल भी तुम बाँधते हो बच्चों के लिखाई -पढाई का सारा […]