कड़वा सच (कविता) – नीरज त्यागी

दर्द  कुछ  इस  तरह किसी भी जीवन में घर कर जाता है। आँखो के आँशुओ को आँखो के घर से बेघर कर जाता है।। अँधेरे भी जीवन मे कुछ ऐसे […]

कच्चे नीम की निमोड़ी सावन जल्दी अईयो रे – डॉ. ममता सिंगला

मानव-जीवन पर प्रकृति के प्रत्येक व्यापार का अनुकूल एवं प्रतिकूल प्रभाव पड़ना अत्यंत स्वाभाविक है। बसंत ऋतु में प्रकृति के चुतन शृंगार से मानव-जीवन हर्षोल्लास से पूर्ण हो जाता है […]

मैत्रेयी पुष्पा का चाक: स्त्री पीड़ा और वि‍द्रोह का स्‍वर – रजनी पाण्डेय / डॉ. सुशीला लड्ढा / डॉ. सुनील कुमार तिवारी

मैत्रेयी पुष्‍पा का उपन्‍यास चाक जहॉं उनके उपन्‍यास इदन्‍नमम का प्रगति‍शील वि‍स्‍तार है, वहीं अपने में स्‍वतंत्र भी। गांव के समाज में नारी की पीड़ा तथा उसके संघर्ष को वर्णि‍त […]

गाय बिना गोदान – डॉ. अवधेश कुमार ‘अवध’

गोदान के संदर्भ में दो मुख्यत: बातें सामने आती हैं। एक 1936 में प्रकाशित मुंशी प्रेमचंद का जग जाहिर उपन्यास गोदान और दूसरा मत्यु के उपरान्त वैतरणी पार करने के […]

केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में प्रकृति, आदमी और साहचर्य का सौन्दर्य – उषा यादव

केदारनाथ अग्रवाल की कविता सौन्दर्यबोध के संबंध में हिन्दी काव्य परम्परा में विशिष्ट प्रकार का प्रस्थानबिन्दु उपस्थित करती है। केदारनाथ अग्रवाल तथा अन्य प्रगतिशील कवियों की सौन्दर्य चेतना ने तो […]

उम्मीदों का मौसम लेकर आई ‘अक्टूबर जंक्शन’ – तेजस पूनिया

हिंदी साहित्य में नई वाली हिंदी के नाम पर हिंदी युग्म प्रकाशन ने एक क्रांति सी पैदा की है। और इस क्रांति में कई युवा और नए लेखक बेस्टसेलर बने […]

समालोचना/आलोचना: वीरे दी वेडिंग – डॉ. विदुषी शर्मा

यह एकता कपूर की एक  चर्चित फिल्म है |  इस फिल्म के बारे में बहुत सी सकारात्मक बातें हैं, बहुत से सकारात्मक सुखांत हैं। इसी के साथ – साथ इतने […]

अनुक्रमणिका

संपादकीय- डॉ. आलोक रंजन पांडेय शोधार्थी मध्ययुगीन समाज : मीरा – विश्वम्भर दत्त काण्डपाल / डॉ. टी. एन. ओझा बाज़ारवादी ताकतों के बरक्स राहुल-अंजली की मानवीय संवेदना एवं उनकी प्रेम-कथा […]

मध्ययुगीन समाज : मीरा – विश्वम्भर दत्त काण्डपाल / डॉ. टी. एन. ओझा

मध्यकाल अपने समय और सरोकारों के साथ एक ऐसा काल है जो, मध्यकालीन रूढ़ियों से जकड़ा हुआ है। ऐसा स्वीकार किया जाता है कि समाज, मनुष्य और साहित्य का आपस […]

बाज़ारवादी ताकतों के बरक्स राहुल-अंजली की मानवीय संवेदना एवं उनकी प्रेम-कथा – डॉ. मीनाक्षी सिंह

कहीं सुना है कि Every girl wants a bad boy, who will be good just for her … and … Every boy wants a good girl who will be bad […]