जयशंकर प्रसाद के काव्यों में नारीवादी दृष्टिकोण – डाॅ0 शक्ति प्रसाद द्विवेदी

‘छायावाद का काल गाँधी जी के नेतृत्व एवं राष्ट्र‘-भावना के प्रसार का काल था’ | उनसे प्रेरित होकर पुरूषों के साथ-साथ स्त्रियों ने भी देश के लिए बढ़-चढ़कर कदम उठाया। ‘असहयोग आंदोलन […]

छायावाद काव्य-भाषा और पल्लव – आशीष जायसवाल

हिंदी साहित्य के इतिहास में ‘छायावाद’ का समय 1918 से 1936 तक माना जाता है । छायावादी काव्य-भाषा और पल्लव को समझने से पूर्व दरअसल छायावाद को समझना होगा । […]

छायावाद की व्यापकता – श्रद्धा वर्मा 

सहानुभूति, कल्पना ,अध्यात्मिक छाया, लाक्षणिक विचित्रता, मूर्तिमत्ता, प्रकृति का मानवीकरण आदि सभी विशेषताएं किसी एक ही युग में प्रचुरता के साथ मिलती हैं तो वह है छायावाद। हिंदी साहित्य में […]

मध्यवर्गीय नारी, समाज और सेवासदन – मनीता ठाकुर / डॉ. टी. एन. ओझा

समाज में नारियों की परिस्थिति अलग-अलग होती है। अलग-अलग वर्ग की नारियों की परिस्थिति भी अलग-अलग होती है। उच्च वर्ग में रह रही स्त्रियों का जीवन अलग प्रकार का होता […]

साहित्य संबंधी प्रेमचन्द की चिन्तन दृष्टि – ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह 

हिन्दी साहित्य के अविस्मरणीय एवं लोकप्रिय लेखक प्रेमचन्द जी ने हिन्दी में कहानी और उपन्यास को सुदृढ़ नींव प्रदान की और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी चित्रण से देशवासियों का दिल जीत लिया। […]

यशोधरा : समय सापेक्षता – डॉ. रूचिरा ढींगरा

भारतीय संस्कृति और भारतीयता के प्रखर उद्घोषक मैथिलीशरण गुप्त    (3 अगस्त 1886-12 दिसंबर 1964)  हिन्दी आधुनिक हिंदी साहित्य में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनके द्वारा सृजित महत्वपूर्ण कृतियां हैं- […]

राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

गौरैया के हक़ में  गांव के चैपाल में चहकती गौरैया मीठे-मीठे गीत सुनाती गौरैया गुड़िया को धीरे से रिझाती गौरैया याद आज आती है हरे-भरे पेड़ों पर फुदकती गौरैया घर […]

चंगेज के बेटे (कहानी) – समीर कुमार

उनकी मूछें घनी एवं मोटी, आँखें गहरी काली, रंग बिल्कुल गोरा, ललाट उन्नत, कद पांच फुट दस इंच, वजन पच्चासी किलोग्राम और उम्र करीब चौबालिस साल थी | चूंकि, वह […]

सृष्टि भार्गव की कविताएँ

फ़रिश्ता चाँद का  हज़ारों गम हैं बिछुड़न के एक नगीना प्रेम का रात उजयाली करने आया एक फ़रिश्ता चाँद का स्वप्न सुंदर नयन मग्न और दरिया जो शाम का वक़्त […]

डॉ. अवधेश कुमार ‘अवध’ की कविताएँ

1. घातक जाल बिछाये हैं घर – बाहर या प्लॉंट सड़क, हर जगह मौत के साये हैं। हमने ही तो आँख मूँदकर, घातक जाल बिछाये हैं।। साफ सफाई रखकर के, […]