सामाजिक अभिव्यक्ति के बदलते स्वरूप में हिंदी सोशल मीडिया की भूमिका – आशीष कुमार पाण्डेय

वर्तमान परिदृश्य में मीडिया अभिव्यक्ति का अग्रणी माध्यम हो गया है। जिसमें सबसे अधिक चर्चित सोशल मीडिया है। सोशल मीडिया ने बहुत कम समय में अधिक गति धारण की है। […]

इंद्रधनुषी दिगंत: त्रिलोचन – शिवम सिंह

‘‘धरती खुशी मना तू बरसात आ गयी है जो बात कल न थी वह बात आ गयी है।’’ बरसात की पहली बूँद ज्यों धरती में समायी त्यों धरती सोधी खुशबू […]

ओस की बूंद : साम्प्रदायिक राजनीति का यथार्थ – डॉ.कमल कुमार

“उन्होंने हाथ बढ़ा कर वह तस्वीर उतारी और दीवार पर पड़ जाने वाले उस दाग को देखने लगे, जो तस्वीर के कारण दीवार पर पड़ा था और अब तक तस्वीर […]

मीरा की भक्ति साधना में सगुण – निर्गुण द्वंद्व – संचना

हिंदी भक्ति काव्य में ‘गिरधर गोपाल’ से अनन्य प्रेम करने वाली मीरा का स्थान महत्वपूर्ण है। वह भारत के कृष्ण भक्तों में एक प्रमुख स्त्री भक्त है। मीरा के सम्पूर्ण […]

कहानियों का बदलता स्वरूप: प्रभात रंजन के विषेष संदर्भ में – डाॅ. नीतू परिहार

कहानी पढ़ना हमेशा ही सुखद रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उसका छोटा होना है। कभी भी कहीं भी हम कुछ समय निकालकर कहानी पढ़ लेते हैं । कहानी पढ़ने […]

राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

हारना वैसे तो हारना एक दुःखदायी क्रिया है लेकिन कभी-कभी यह सुखदायी भी हो जाता है। जैसे हम हार जाते हैं किसी छोटे से बच्चे से खेल में और खुश […]

मनोज कुमार की कविता

पूछा…… क्‍यों……. नहीं ? अम्‍मा………..अम्‍मा………अम्‍मा जाऊँ ? अम्‍मा……….मॉं………….. माई जाऊँ ? देख मैं अकेला तेरे खाने का कर रही हूँ तैयारी ठंडी होने से पहले बिन बुलावे से आना मेरा […]

आदमी ( कविता) – मनोज शर्मा

रोज़ आदमी आदमी नहीं होता कभी कभी आदमी में एक अलग किस्म का आदमी होता है जो बिल्कुल भिन्न अवसरवादी सा होता है जो अलग बिल्कुल सपाट नया चेहरा लिए […]

बिनोद कुमार रजक की कविताएँ

खेल सांत्वना का मृतक परिवार से मिलते हो ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं उनके जीवन में सांत्वना के पुल भी तुम बाँधते हो बच्चों के लिखाई -पढाई का सारा […]

 भूख ( कहानी ) – तेजस पूनिया

दुनिया चे ऐसी कोई शह नी जट्टीये। जेड़ी तेरे कदमां चे धरी जाणी नी।। वो लड़की कब से दीप को फोन किए जा रही थी मगर सामने से यह कॉलर […]