दृष्टिहीनता से मुकाबला मुश्किल नहीं – संजय सक्सेना

सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मा कश्चिद् दुःख भागभवेत..। हमारे देश में ईश्वर से प्रार्थना के दौरान इस श्लोक का पाठ भी किया जाता है। और […]

फाइटर की डायरी (मैत्रेयी पुष्पा) : अंजलि

“फाइटर की डायरी” ये मेरे कॉलेज लाईब्रेरी की पहली किताब है। वैसे मैं कंप्यूटर साइंस की स्टूडेंट हूं पर कहानियों और उपन्यास को पढ़ने में दिलचस्पी रखती हूं इसीलिए इस […]

साल 2019 की फ़िल्में कौन कितना पानी में – तेजस पूनिया

साल 2019 में लगभग 100 से भी ऊपर फ़िल्में रिलीज हुई। कुछ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती नजर आईं तो कुछ ने दिलों में जगह बनाने की कोशिश की। आज […]

अनुक्रमणिका

संपादकीय डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय बातों – बातों में अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र से सहचर टीम की आत्मीय बातचीत   शोधार्थी वैश्वीकरण की पृष्ठभूमि और ‘हंस’ की कहानियाँ – डॉ. संजीव […]

अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र से सहचर टीम की आत्मीय बातचीत

  प्रश्न 1 – सर सबसे पहले हम यह जानना चाहेंगे कि बिहार से लेकर मुंबई की यात्रा आपने कैसे तय की ?अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में कुछ साझा […]

वैश्वीकरण की पृष्ठभूमि और ‘हंस’ की कहानियाँ – डॉ. संजीव कुमार

आजादी के पश्चात भारतीय समाज सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक रूप से सबसे अधिक 90 के दशक में प्रभावित होता है. वैश्वीकरण का यह दौर भारतीय समाज पर गहरा छाप […]

शब्द चित्रों में बोलती पद्मजा – डॉ. नीतू परिहार

आधुनिकता के दौर में सब कुछ जल्दी-जल्दी बदल रहा है। किसी के मुताबिक ढलने का सोचो तब तक तो वह बदल जाता है। समझ नहीं आता बदलाव की ठावं और […]

गांधी विचारधारा का हिंदी कथात्मक साहित्य पर प्रभाव – डॉ.सुनील डहाळे

बीसवीं शताब्दी में भारतीय राजनीति के क्षेत्र में सबसे प्रभावकारी नेता के रूप में मोहनदास करमचंद गांधी का उदय हुआ | भारतभूमि को स्वतंत्रता दिलाकर स्वराज्य स्थापित करने की मनीषा […]

भक्तिकालीन नारी संतों की सामाजिक चेतना – ज्योत्स्ना नारायण

जब संत काव्यधारा की बात चलती है तो हमारे सामने कबीर, रैदास आदि पुरुष संतों की छवि उभरकर आती है। हिन्दी साहित्य के अधिकांश आलोचकों ने संत साहित्य की आलोचना […]