देव की विशिष्ट स्त्री-दृष्टि (रस विलास के सन्दर्भ में) – बबली गुर्जर

हिन्दी साहित्य के इतिहास का आदिकाल और रीतिकाल हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। जहां आदिकाल ग्रन्थों की प्रमाणिकता को लेकर तो वही रीतिकाल अपनी विषय सामग्री को […]

रहीम कृत दोहावली में उनका धर्म-भक्ति विषयक दृष्टिकोण – रेखा

रहीम का जन्म लाहौर (अब पाकिस्तान) में 17 दिसम्बर , सन १८५६ को हुआ । उनकी माता का नाम सुल्ताना बेग़म था । पिता बैरम खां मुग़ल बादशाह हुमायूँ के […]

सूर के काव्य में कृषक जीवन की अभिव्यक्ति और हिंदी आलोचना – अनिल कुमार

                   “प्रभु  जू , यौँ  किन्ही हम खेती ।                      बंजर    भूमि, गाउ   हर जोते, अरु   जेती की तेती । […]

मानवीय मूल्य, मर्यादा एवं आदर्श के रूप में राम (रामकथा के विशेष संदर्भ में) – युगल किशोर यादव

आज मानव जीवन अनेक विसंगतियों एवं विडम्बनाओं से जूझ रही हैं। एक समय हुआ करता था जब लोग प्रेम, स्नेह, सद्भावना के साथ जीवन यापन किया करते थे। एक दूसरे […]

व्‍याकुल पीढ़ी की नस्‍लें – डॉ. जि‍तेन्‍द्र भगत

अलका सरावगी का अद्यतन उपन्‍यास ‘जानकीदास तेजपाल मैनशन’ (2015) कलकत्‍ता के बड़ाबाजार (सेंट्रल एवेन्‍यू) में स्‍थि‍त 80 परि‍वारोंवाली एक पुरानी जर्जर इमारत का नाम है। वह लगातार झुक रही है, […]

राकेशधर द्विवेदी की कविताएँ

एक साहित्यिक गोष्ठी का सारांश शहर के तमाम बुद्धिजीवियों कथाकारों और कवियों ने हिन्दुस्तान की समस्याओं को लेकर संगोष्ठी की मंच पर हिन्दुस्तान का नक्शा लगा हुआ था किसी ने […]

डॉ. दिग्विजय कुमार शर्मा “द्रोण” की कविता

अबकी बार इस बार मुझे लगा कि कैसे चीजें बार बार ज्यादा याद आती हैं और टूट टूट कर बुरी तरह से दिल को आहत पहुंचाती हैं। बाहर निकलकर जिधर […]

पुराना किला और चोर (कहानी) – संदीप शर्मा

दोनों ने पुराने किले के खंडहर की ओर कदम मोड़ लिए। भागते हुए एक चोर बोला,‘‘मैं कहता हूं एक बार सोच लो, क्या उसी ओर दौड़ना है। वहां तो पहले […]

स्कूटी की सवारी (बाल कविता) – नीरज त्यागी

नई स्कूटी लेकर आया राजू भालू, उसका दोस्त चिम्पू बंदर है बहुत चालू। मीठी बातों से राजू को बहकाता, रोज उसकी स्कूटी मजे से चलाता।। एक दिन चिम्पू का चौराहे […]

सुनील कुमार शर्मा की कविताएँ

प्रिय तुम हो कहाँ गगन कहाँ धरा पर ही वो मनोहर सौंदर्य खोजता हूँ । चुभन कहाँ मधुकलश लिये भावों का मैं घूमता हूँ । सखा तुम हो कहाँ ? […]